ठाणे : ठाणे शहर में शिवसेना शिंदे गुट को सीधी चुनौती देने का मन एनसीपी ने बना लिया है । इसी क्रम में एनसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने शिवसेना के दिवंगत नेता व ठाणे जिला प्रमुख आनंद दिघे के बैनर और पोस्टर पूरे शहर में लगाए हैं। एक और जहां शिंदे गुट एनसीपी के कुछ पदाधिकारियों और नगरसेवक को फोड़ने की तैयारी में लगा हुआ है तो वही स्वर्गीय आनंद दिघे समर्थक बैनर और पोस्टर लगाकर आव्हाड ने शिंदे गुट को सीधी चुनौती दी है। बैनर और होर्डिंग को लेकर ठाणे शहर में कई तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी व्यक्त की जाने लगी है।स्वर्गीय दिघे की जयंती पर एनसीपी ने उन्हें बैनर और पोस्टरों के माध्यम से याद किया है।
शिवसेना के इतिहास में पहली बार ठाणे मनपा में शिवसेना का सत्ता
शिवसेना के इतिहास में पहली बार ठाणे मनपा में शिवसेना को मिली थी। उसके बाद शिवसेना जिले की अन्य नगर पालिकाओं में सत्ता हासिल करने में कामयाब रही। शिवसेना के दिवंगत दिघे ने इसमें अहम भूमिका निभाई। उन्होंने शिवसेना को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया था। आनंद दीघे का 21 साल पहले निधन हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जिले में पार्टी की ताकत बढ़ाई। उन्होंने छह महीने पहले शिवसेना से बगावत कर नई सरकार बनाई थी। इस विद्रोह के बाद उन्हें ठाणे जिले से भरपूर समर्थन मिला। जबकि, सांसद राजन विचारे और दिघे के भतीजे केदार दिघे ने ठाकरे का समर्थन किया।
दिवंगत आनंद दिघे की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए बैनर लगाए
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे की सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी के नेता जितेंद्र आव्हाड के बोर्ड पर आनंद दिघे की तस्वीर छपी है। आनंद दिघे के पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मधुर संबंध थे। उस समय जितेंद्र आव्हाड कांग्रेस और फिर राष्ट्रवादी पार्टी के लिए काम कर रहे थे। आनंद दिघे से उनके अच्छे संबंध थे। लेकिन इस साल पहली बार आव्हाड द्वारा दिवंगत आनंद दिघे की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए बैनर लगाए हैं। जिससे शहर में अलग-अलग राजनीतिक मायने निकाले जा रहे है। हालांकि ठाणे के राजनितिक विशेषज्ञों का कहना है कि होर्डिंग और बैनर शिंदे गुट को चिढ़ाने और ठाकरे गुट को समर्थन देने के लिए लगाया गया है।


