
ठाणे : ठाणे में सोमवार को बिजली के निजीकरण के खिलाफ उग्र विरोध आंदोलन किया गया। महाराष्ट्र राज्य विद्युत कर्मचारी, अभियंता, अधिकारी, संघर्ष समिति की ओर से महावितरण कंपनी के भांडुप परिमंडल के अंतर्गत स्थित ठाणे,मुलुंड,भांडुप, नवी मुंबई,बेलापूर,पनवेल,तळोजा व उरण में बिजली वितरण करने का परवाना मैसर्स अडानी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड नवी मुंबई को नहीं दिए जाने को लेकर आंदोलन किया। साथ ही कहा गया है कि राज्य सरकार बिजली कंपनी का निजीकरण कर उसका अस्तित्व ही मिटाने में लगी है । बिजली निजीकरण प्रस्ताव पर रोक लगाने की मांग करते हुए सोमवार को विरोध आंदोलन किया गया। इस आंदोलन के दौरान मांग की गई की बिजली विभाग में ठेका पर काम करने वालों की सेवा स्थाई की जाए। इसके साथ ही बिजली विभाग में जो 42 हजार रिक्त पद हैं,उसे भी भरने की प्रक्रिया शुरु की जाए। इसके साथ ही 1.4.2019 के बाद कार्यान्वित किए गए उपकेंद्र ठेका पद्धति पर चलाने को भी बंद करने की मांग की गई है।
जलविद्युत केंद्र के निजीकरण का भी विरोध
महानिर्मिती कंपनी के जलविद्युत केंद्र के निजीकरण का भी विरोध किया गया है। इन तमाम मांगों को लेकर आज बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ अभियंता अधिकारी, ठेका कामगार, राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, बिजली ग्राहक संगठनों का विरोध विरोध मोर्चा सोमवार को अधीक्षक अभियंता कार्यालय महावितरण कंपनी ठाणे में आयोजित किया गया। इस मोर्चे में 15,000 से अधिक बिजली विभाग के कर्मचारी, अधिकारी, अभियंता व अन्य कर्मियों के साथ ही राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग सहभागी हुए। वैसे विरोध आंदोलन के पहले ठाणे पुलिस ने परवानगी नहीं दी। इसके बाद हजारों कर्मचारियों ने महावितरण कंपनी के स्थानीय कार्यालय के सामने हजारों की संख्या में उपस्थित होकर अपना विरोध प्रदर्शित किया।
जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध मोर्चा
इस विरोध आंदोलन में संघर्ष समिति के नेते डॉ. संदीप वंजारी, सचिन शिंदे,कॉम्रेड कृष्णा भोयर,संजय ठाकूर,अरुण पिवल,संजय मोरे,आर.टी. देवकात,सय्यद जहिरोदिन,राजन भानुशाली,राकेश जाधव,विवेक महाले,सुयोग झुटे,संजय खाडे, उत्तम पारवे,राजन शिंदे,शिवाजी वायफलकर,प्रकाश गायकवाड,प्रवीण वर्मा,आर.डी.राठोड,राजअली मुल्ला, मुकुंद हनवते श्रीमती नेहा मिश्रा,प्रभाकर लहाने,नागोराव पराते,अनिल तराले,आर.एच.वर्धे,ललित शेवाले आदि पदाधिकारियों ने मार्गदर्शन किया। संघर्ष समिति ने ठाणे पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध आंदोलन करने की अनुमति देने की मांग की, जिसे मान्य कर लिया गया। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध मोर्चा का आयोजन हुआ। पुलिस परमिशन मिलने के बाद महावितरण कंपनी कार्यालय से मुलुंड चेक नाका तक विरोध मोर्चा निकालने की अनुमति दी गई।


