
ठाणे : ठाणे मनपा के फायलेरिया विभाग में वर्ष 2016 से काम कर रहे ठेका कामगारों ने ठाणे के खारटन रोड स्थित फाइलेरिया विभाग कार्यालय के बाहर धरना आंदोलन किया। इस विरोध आंदोलन में इंटक के ठाणे जिला अध्यक्ष सचिन शिंदे की भी उपस्थिति रही।
फाइलेरिया ठेका कामगारों के आंदोलन को इंटक कांग्रेस अध्यक्ष सचिन शिंदे व संगम डोंगरे के साथ ही प्रभाग कांग्रेस अध्यक्ष प्रविण खैरालिया ने भी अपना समर्थन जाहिर किया। कामगारों का नेतृत्व कर रहे मुकेश रावत ने बताया कि ये कामगार वर्ष 2016 से ठाणे महानगरपालिका के फाइलेरिया विभाग में ठेका पद्धति पर काम कर रहे हैं। कोरोना संकट के समय भी इन कामगारों ने अपनी जान की परवाह नहीं करते अपनी सेवा नियमित रखी थी।।
बताया गया कि कोरोना संकट में फाइलेरिया विभाग में काम करने वाले कई ठेका कामगारों की मौत भी इस बीमारी की चपेट में आने से हुई,लेकिन इसके बाद भी वे अपनी नियमित सेवा देते रहे। इतना ही नहीं जब कोकण में आपदा आई थी,तो उस समय भी फाइलेरिया विभाग के इन ठेका कामगारों ने वहां जाकर कोने-कोने में लोगों की सेवा की थी। बिना अपेक्षा वे अपनी सेवा देते रहे है। परंतु पिछले नवंबर से कामगारों का पगार रोक दिया गया है। इतना ही नहीं 30 अप्रैल से उन्हें ब्रेक भी दे दिया गया है।
ठाणे मनपा फैलेरिया विभाग में कुछ ऐसे लोगों से सेवा के लिए ले रहा है, जिन्हें इस विभाग के कार्यों का अनुभव भी नहीं है, लेकिन पूर्व में काम कर चुके फायलेरिया विभाग के इन ठेका कामगारों को नहीं लिया जा रहा है। कामगारों का आरोप है कि अप्रैल से लेकर अब तक उन्हें सेवा पर नहीं बुलाया गया है। जिस कारण वे गंभीर बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उनके परिवारों को आर्थिक परेशानी हो रही है। उनका आरोप है कि वे अपनी दशा को लेकर मुख्यमंत्री, महापौर व अन्य राजनेताओं को लगातार अवगत कराते आए हैं। परंतु अब तक इस बारे में किसी भी तरह का प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया गया है। फायलेरिया विभाग के आंदोलनकर्मी कामगारों ने राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मांग की है कि उनकी समस्या के निदान में वे हस्तक्षेप करें। अन्यथा उनके ऊपर अन्याय होता ही रहेगा।


