
ठाणे : ऐतिहासिक महापुरुषों पर बन रही फिल्मों को लेकर उठे विवाद के बीच विधायक प्रताप सरनाईक ने राज्य के सीएम एकनाथ शिंदे से मांग की है कि ऐसी फिल्मों के लिए इतिहासकारों की एक समिति गठित की जाए। किसी भी ऐतिहासिक फिल्मों को इस समिति की हरी झंडी के बाद ही प्रदर्शित किया जाए।
सरनाईक ने सीएम शिंदे को लिखे पत्र में कहा है कि यदि ऐतिहासिक महापुरुषों के जीवन पर फिल्म बनाई जाती है और इतिहासकारों की गठित समिति उस फिल्म को देख कर उसे प्रदर्शित करने की हरी झंडी देगी, तो इससे किसी भी तरह के विवादों पर स्थायी विराम लग जाएगा। इस बारे में राज्य सरकार को विशेष पहल करने की आवश्यकता है। ताकि फिल्मों को लेकर उठे विवादों का राजनीतिकरण करने से बचा जा सके।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे पत्र में सरनाईक ने कहा है कि फिल्म मराठी हो या हिंदी, देश में फिल्म प्रेमियों की कमी नहीं है। इसके साथ ही समर्पित फिल्म निर्माता और निर्देशक भी सब कुछ झोंक कर फिल्म का निर्माण करते हैं। किसी भी फिल्म का किसी भी दर्शक पर मानसिक प्रभाव पड़ता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। अब तक भारत में कई ऐतिहासिक फिल्मों का निर्माण किया जा चुका है और जिसे अच्छी खासी और सकारात्मक प्रसिद्धि भी मिली है। इस संदर्भ में कई फिल्मों की चर्चा की जा सकती है। लेकिन जिन फिल्मों को लेकर विवाद की स्थिति पैदा होती है, उससे बचने के लिए इतिहासकारों की समिति का सहयोग वर्तमान संदर्भ में दिया जाना आवश्यक हो गया है। अब तक छत्रपति शिवाजी महाराज, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर साथ ही शिवाजी राजे भोसले बोलतोय, बाल भिमराव, पावनखिंड, तान्हाजी, फर्जंद, शेर शिवराज जैसी सुंदर फिल्म फिल्मों का निर्माण किया गया है। जो काफी सफल रही तथा ये फिल्में विवादों से दूर रही है। प्रताप सरनाईक ने कहा कि मराठी फिल्म ’हर हर महादेव“ और ’वेडात मराठे वीर दौडले सात“ का भी संबंध छत्रपति शिवाजी महाराज से है । इस कारण इन दोनों फिल्मों को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वीं पीढ़ी के वंशजों छत्रपति संभाजी राजे भोसले व छत्रपति शिवेंद्रराजे भोसले ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक की है। विवादों की इस स्थिति से बचने के लिए विधायक प्रताप सरनाईक ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मांग की है कि इतिहासकारों की एक समिति गठित की जाए। इस समिति की सहमति के बाद ही किसी भी ऐतिहासिक फिल्म के प्रदर्शन को हरी झंडी मिले।


