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Thane : ठाणे के वार्ड 6 में ‘नोट के बदले वोट’ का आरोप

Thane: Allegations of 'Vote for Cash' in Ward 6 of Thane

पुलिस ने दर्ज की एनसीआर
ठाणे : (Thane)
ठाणे महानगरपालिका चुनाव (Thane Municipal Corporation elections) के दौरान बुधवार को वार्ड नंबर 6 में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद वहां मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए खुलेआम पैसे बांटे जा रहे थे। दोपहर करीब 12:30 बजे हुई इस घटना की सूचना मिलते ही वर्तक नगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एनसीआर (NCR) दर्ज कर ली है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है।

कानूनी धाराएं और आरोपियों का इनकार
पुलिस ने इस मामले में ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ (Representation of the People Act, 1951) की धारा 126(1), 126(2) और 126(3) के तहत मामला संज्ञान में लिया है। ये धाराएं चुनाव के दौरान अनुचित व्यवहार और वोटरों को प्रभावित करने से संबंधित हैं। हालांकि, जिन लोगों पर पैसे बांटने का आरोप लगा है, उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से नकार दिया है। उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं और यह विरोधियों द्वारा उन्हें फंसाने की एक राजनीतिक साजिश है। इसके बावजूद, पुलिस प्रशासन अभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि करने में जुटा है।

सिर्फ एनसीआर पर सवाल, जनता में आक्रोश
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई की प्रकृति पर उठाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने वाले इतने गंभीर आरोपों के बावजूद मामला सिर्फ एक एनसीआर (Non-Cognizable Report) तक ही क्यों सीमित रखा गया? लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या लोकतंत्र बिकाऊ है और जब वोटिंग प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में है, तो सख्त कार्रवाई कब होगी? आम जनता का कहना है कि यदि पैसे के दम पर वोट खरीदने के आरोपों की केवल खानापूर्ति वाली जांच होगी, तो आदर्श आचार संहिता का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

चुनाव आयोग की भूमिका पर टिकी निगाहें
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की बात कह रही है। लेकिन अब पूरे राज्य की निगाहें चुनाव आयोग (Election Commission) पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या आयोग इस मामले का स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेगा और एक कड़ा उदाहरण पेश करेगा? यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि चुनाव आयोग के लिए भी एक चेतावनी है। यदि समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आम वोटर का चुनाव प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता से भरोसा उठने का खतरा पैदा हो सकता है।

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