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Tehran : ईरान में सर्वोच्च नेता के नाम पर विचार के लिए बैठकों का दौर जारी

Tehran: A series of meetings continues in Iran to discuss the name of the Supreme Leader

तेहरान : (Tehran) अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Iran’s Supreme Leader, Ayatollah Ali Khamenei) के उत्तराधिकारी को लेकर पिछले तीन दिनों में तेहरान एवं अन्य गुप्त ठिकानों पर कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी है।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष का बुधवार को पांचवां दिन है। पिछले तीन दिनों में सर्वोच्च नेता को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी है। ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत गठित अस्थायी नेतृत्व परिषद (TLC) की हालिया बैठकों में संभावित नए सर्वोच्च नेता के नामों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। यह परिषद राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, न्यायपालिका प्रमुख गोलाम-हुसैन मोहसनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के सदस्य अलीरेज़ा अराफी से मिलकर बनी है। अलीरेजा अराफी और मोहसनी-एजेई खुद को सर्वोच्च नेतृत्व के संभावित दावेदार के रूप में देख रहे हैं।

राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने दोनों सदस्यों के बीच सहमति नहीं बनने की स्थिति में सहभागी या सामूहिक नेतृत्व के मॉडल पर विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने मध्यमार्गी और सुधारवादी खेमे के नजदीकी कुछ नाम भी प्रस्तावित किए, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी और हसन खुमैनी (former President Hassan Rouhani and Hassan Khomeini) शामिल हैं, जो इस्लामी गणराज्य के संस्थापक एवं प्रथम सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्ला खुमैनी के पोते हैं।

इसी बीच, एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बताया गया है कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई और उनके कार्यालय के वरिष्ठ उप प्रमुख अली-असगर हेजाज़ी पर हुए हमले के बाद उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। ये दोनों ही सर्वोच्च नेता पद की उत्तराधिकार की दौड़ में प्रमुख दावेदार माने जाते रहे हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, ओसूलगरायान और पायदारी (Osulgaryan and Paydari) जैसे कट्टरपंथी धार्मिक गुट हसन रूहानी और हसन खुमैनी जैसे नामों का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, अली खुमैनी के नाम पर अपेक्षाकृत सहमति बनती दिख रही है। अली खुमैनी, अहमद खुमैनी के पुत्र और हसन खुमैनी के भाई हैं। बताया जा रहा है कि स्वयं अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहले उनका नाम सुझाया था क्योंकि वे सैयद पैगंबर मोहम्मद के वंशज होने के नाते विशेष सम्मान रखते हैं।

उत्तराधिकार की चर्चा में अन्य नाम भी सामने आए हैं। इनमें असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य मोहसिन अराकी और गार्जियन काउंसिल के जूरिस्ट सैयद मोहम्मद-रेज़ा मोदरेसी यज़्दी शामिल हैं। इनके साथ अलीरेज़ा अराफी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में लिया जा रहा है।

एक दिन पहले यानी मंगलवार को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (Assembly of Experts) के कार्यालय को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में नष्ट किए जाने की खबर सामने आई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला उस समय हुआ जब असेंबली के सदस्य देश के अगले सर्वोच्च नेता के चयन को लेकर मतदान प्रक्रिया में जुटे थे। बैठक का उद्देश्य संभावित उम्मीदवारों के नामों में से किसी एक पर सहमति बनाना था। हालांकि, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स पर हुए इस हमले में हताहतों की संख्या को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उल्लेखनीय है कि इस्लामिक क्रांति के बाद वर्ष 1979 में ईरान के इस्लामिक गणराज्य बनने पर अयातुल्ला रूहोल्ला खुमैनी प्रथम सर्वोच्च नेता बने थे। उनको इस्लामिक गणराज्य का संस्थापक माना जाता है, जो 1989 तक इस पद पर रहे। उनके निधन के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई सर्वोच्च नेता नियुक्त किए गए थे। वर्ष 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में पिछले ढाई हजार साल से चले आ रहे राजतांत्रिक शासन का अंत हुआ।

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