रामगढ़ : जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत रउता वन क्षेत्र में स्थापित प्लांट की जमीन की जांच में कई खामियां सामने आई है। इसमें सबसे बड़ी खामी यह उजागर हुई है कि वहां जमींदारी उन्मूलन के पूर्व और पश्चात का कोई लगान रसीद अधिकारियों को नहीं मिला है। इस बात का खुलासा रामगढ़ डीसी चंदन कुमार द्वारा जारी किए गए आदेश से हुआ है। डीसी के द्वारा जमाबंदी रद्द किए जाने का फैसला 10 फरवरी 2024 को सुनाया गया था। इस फैसले में यह बताया गया है कि बीएलआर एक्ट के प्रावधान के अनुसार 01/01/1946 के पूर्व से लेकर अद्यतन समय तक भूमि का राजस्व कागजात जैसे जमाबंदी रिटर्न की प्रति लगान भुगतान रसीद व अन्य कोई दस्तावेज प्लांट मालिकों और रैयतों के द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया था। जबकि वह जमीन वन विभाग की अधिसूचना 2 जनवरी 1953 के आधार पर अधिसूचित की गई थी।
आयुक्त के आदेश के अनुरूप नहीं कायम है जमाबंदी
रउता वन क्षेत्र में हजारीबाग कमिश्नर के पत्रांक 382 दिनांक 5 फरवरी 1985 के अनुरूप जमाबंदी कायम नहीं की गई है। उस क्षेत्र में जमींदारी उन्मूलन के पूर्व और पश्चात से कोई भी लगातार लगान रसीद प्रस्तुत नहीं किया गया है। जबकि उस क्षेत्र में जमाबंदी वर्ष 2004 और 2005 के आधार पर कायम की गई है। राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के मुख्य सचिव के पत्रांक 2074 दिनांक 13/5/2016 के अनुसार भी यह जमाबंदी विधि सम्मत नहीं है। अधिकारियों ने इस बात का भी हवाला दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका 202/1995 टीएन गोदावरमण में यह निर्णय है कि सर्वे खतियान में दर्ज जंगल, जंगल झाड़ भूमि को वन भूमि माना गया है। फालत: वन भूमि पर बंदोबस्ती सरकार के आदेश के बिना अवैध है।
सरकारी भूमि को क्षति पहुंचाने के लिए कायम की गई जमाबंदी
डीसी की ओर से जारी किए गए आदेश में यह भी स्पष्ट है कि रउता वन क्षेत्र में जमीन की जमाबंदी सरकारी भूमि को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। मांडू अंचल अधिकारी के द्वारा राजस्व कर्मचारी के प्रतिवेदन और राजस्व कागजातों की पूरी छान-बीन की गई थी। जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बिना कोई ठोस आधार के अवैध रूप से जमाबंदी कायम की गई। साथ ही यह भी पता चला कि भूतपूर्व जमींदार के द्वारा बिहार भूमि सुधार अधिनियम के उद्देश्य को विफल करने के उद्देश्य से और सरकार को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से जमाबंदी खोल दी गई है। इससे यह स्पष्ट है कि वन क्षेत्र में जमाबंदी पूरी तरीके से फर्जी है।


