Prayagraj : उच्च न्यायिक सेवा में जाने के लिए सात साल के वकालत की प्रैक्टिस जरूरीः हाईकोर्ट

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हाईकोर्ट ने जौनपुर के याची के उच्च न्यायिक सेवा में चयन समिति के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका की खारिज

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायिक सेवा में जाने के लिए अभ्यर्थी की वकालत में सात साल की प्रैक्टिस जरूरी है। अगर वह सात साल की प्रैक्टिस पूरी नहीं करता है तो वह सेवा में जाने योग्य नहीं है।

उच्च न्यायिक सेवा अधिनियम, बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिनियम की धारा 43 और 49, अधिवक्ता अधिनियम की धारा 49 के तहत एक अधिवक्ता को प्रैक्टिस जारी रखने के दौरान अंशकालिक/पूर्णकालिक रोजगार लेने से पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।

मामले में याची तकरीबन एक वर्ष रोजगार में था। उसने जब उच्च न्यायिक सेवा पास किया तो उसकी प्रैक्टिस की कुल अवधि नहीं पाई गई। वह प्रैक्टिस में छह साल, चार महीने और 19 दिन से था। समय पूरा न होने से वह न्यायिक सेवा में नहीं जा सकता है, भले ही वह परीक्षा पास कर लिया। लिहाजा, उच्च न्यायिक सेवा चयन समिति के आदेश में कोई दोष नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति डी. रमेश की खंडपीठ ने जौनपुर के याची शशिकांत तिवारी की याचिका को खारिज करते हुए दिया।

मामले में याची वर्ष 1998 में एक अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुआ था। वर्ष 2009 से वर्ष 2010 तक एक लॉ फर्म में काम करता रहा। इसके बाद वह फिर से वकालत में आ गया। उसने 2017 में उच्च न्यायिक सेवा में हिस्सा लिया और साक्षात्कार में शामिल होकर 471 अंक हासिल किए। लेकिन, उसका चयन नहीं हुआ। जबकि, चयन समिति की ओर से जारी परिणाम में उससे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी का नाम चयन सूची में था। अभ्यर्थी ने प्रत्यावेदन दिया लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

याची ने उसे हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 233(2) और यूपी के नियम 5(सी) में निहित पात्रता शर्त के अनुसार उच्च न्यायिक सेवा में हिस्सा लेने के लिए सात साल की नियमित प्रैक्टिस जरूरी है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 43 और 49, अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 49 के तहत बनाए गए नियम के तहत एक वकील को अपनी प्रैक्टिस जारी रखने के दौरान अंशकालिक/पूर्णकालिक रोजगार लेने से पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। यदि वह ऐसा कोई रोजगार लेता है बार काउंसिल को सूचित करेगा जबकि वह एक वकील के रूप में अभ्यास करना तब तक बंद कर देगा जब तक वह ऐसे रोजगार में बना रहता है और नियम 49 एक कानूनी कल्पना बनाता है कि पूर्णकालिक रोजगार लेने पर वह एक वकील नहीं रह जाता है और उसे एक वकील का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।