
आलोक गुप्ता
प्रयागराज: (Prayagraj) यमुनापार के मेजा-कोहड़ार घाट में स्थित मेजा पावर प्लांट (मेजा ऊर्जा निगम) पर्यावरणीय हितों को पूरी तवज्जो दे रहा है। मेजा ऊर्जा निगम ने कहा कि यह प्लांट देश के उन 30 प्रतिशत चुनिंदों उत्पादन इकाइयों में से एक है, जो गैसीय उत्सर्जन में सल्फर ऑक्साइड को नियंत्रित करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय के मानकों के अनुरूप फ़्लू गैस डिसल्फराइज़ेशन (FGD) संयंत्र स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। इसकी मदद से स्टैक उत्सर्जन से लगभग 99% सल्फर के ऑक्साइड से मुक्त हो जाएंगे।
मेजा ऊर्जा निगम ने कहा, महामारी, लॉकडाउन और अन्य संबद्ध मुद्दों के बावजूद मेजा ऊर्जा निगम अपने दोनों एफजीडी संयंत्र को 2023 में पूरा करने के लिए कटिबद्ध है, जो पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत जारी समय सीमा वर्ष 2026 काफी पहले है।
मेजा ऊर्जा निगम ने अपने संयंत्र और टाउनशिप में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम को संस्थागत बनाने के साथ-साथ वर्षा जल संचयन की सुविधा के द्वारा जल संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाए हैं। पूर्ण राख उपयोग की दिशा में निरंतर प्रयास करते हुए, मेजा ऊर्जा निगम न केवल प्रदूषण नियंत्रण में योगदान दे रहा है बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
गौरतलब है कि एनटीपीसी और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम का संयुक्त उपक्रम मेजा ऊर्जा निगम अपने 660 मेगावाट की दो इकाइयों के साथ विद्युत उत्पादन कर प्रयागराज क्षेत्र को न केवल समग्र विकास की ओर अग्रसर कर रहा है, बल्कि गैसों और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को न्यूनतम कर हरित भविष्य सुनिश्चित करने की ओर भी द्रुत गति से आगे बढ़ रहा है।


