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Prayagraj : भीषण ठंड और घने कोहरे के बीच लगी आस्था की डुबकी, संगम की रेती पर शुरू हुआ कल्पवास

आलोक गुप्ता
प्रयागराज: (Prayagraj)
संगम की रेती पर चलने वाला माघ मेला पौष पूर्णिमा स्नान के साथ गुरुवार को शुरू हो गया। भीषण शीतलहर के बीच रात के दूसरे पहर से ही पौष पूर्णिमा का स्नान शुरू हो गया, जो दोपहर बाद तक जारी रहा। ठंड और घने कोहरे के बीच माघ मेले के पहले स्नान पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मां गंगा में डुबकी लगाई।स्नान पर्वको सकुशल संपन्न कराने के लिए माघ मेला प्राधिकरण की तरफ से सुरक्षा के विशेष इंतजामात किए गए थे। संगम तट पर एटीएस कमांडो के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों के सुरक्षा कर्मी चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे। आज, पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही माघ माह भर चलनेवाला कल्पवास भी शुरू हो गया है। आज, बीते दिनों की अपेक्षा ठंड भी बहुत रही।

पौष पूर्णिमा पितरों की भी पूर्णिमा मानी जाती है। इस दिन पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर कल्पवास शुरू होता है और कल्पवासी संगम की रेती पर एक माह तक कठिन तप और जप करते हैं। एक माह तक कल्पवास करने से काया का कल्प हो जाता है। पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास का क्रम चलता है
आज, गुरुवार को भोर में शुरू हुआ स्नान, ध्यान का सिलसिला अनवरत जारी रहा। आज शहर का न्यूनतम पारा पांच डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। बावजूद इसके मेलार्थियों का जोश कम नहीं हुआ। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस, प्रशासन के आलाधिकारी भ्रमण करते रहे। इसके अलावा अलग-अलग घाटों व मार्गों पर पीएसी, एटीएस, आरएएफ, नागरिक पुलिस, महिला पुलिस के साथ घुड़सवार दस्ता भी भ्रमण करता नजर आया। स्नान के दौरान किसी भी तरह की विषम परिस्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों कोलगाया गया था।

Prayagraj: Dip of faith amidst severe cold and dense fog, Kalpavas started on the sands of Sangam

बताते चलें कि स्नान के लिए मेला क्षेत्र में 14 घाट बनाए गए हैं, जिनकी लगभग लंबाई 1800 मीटर के आसपास है। जबकि सुरक्षा के लिए 5000 सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। पौष पूर्णिमा के मौके पर प्रशासन ने पांच लाख लोगों के स्नान का अनुमान लगाया था। हालांकि समाचार लिखे जाने तक आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया था।
इसके बाद माघ मेले में 14 व 15 जनवरी (शनिवार व रविवार) को मकर संक्रांति का स्नान होगा। जबकि 21 जनवरी, शनिवार को माघ मेले में मौनी अमावस्या का स्नान पर्व होगा। इसके बाद चौथा स्नान पर्व 26 जनवरी को वसंत पंचमी का होगा। पांचवां स्नान पर्व 5 फरवरी को माघी पूर्णिमा का और अंतिम स्नान पर्व 18 फरवरी को महाशिवरात्रि का होगा।

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