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Palwal : श्री विश्वकर्मा कौशल विवि स्थापित करेगा उत्तर भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक स्किल एकेडमी

पलवल : श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय उत्तर भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक स्किल एकेडमी स्थापित करेगा। इस एकेडमी में हर साल लगभग तीन हजार युवाओं को लॉजिस्टिक हब के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इस परियोजना में टीवीएस लॉजिस्टिक कंपनी श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की भागीदार होगी। बुधवार को टीवीएस लॉजिस्टिक कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और एकेडमी की स्थापना पर कुलपति डा. राज नेहरू के साथ बैठक की।

इस बैठक में टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस के रीजनल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ऋषि दीवान और जोनल जनरल मैनेजर धीरज शर्मा शामिल थे। लॉजिस्टिक क्षेत्र में कुशल कामगारों की मांग को देखते हुए श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने लॉजिस्टिक स्किल एकेडमी स्थापित करने का निर्णय लिया है। कुलपति डा. राज नेहरू ने कहा कि यह रोजगार का बहुत तेजी से उभरता क्षेत्र है। लॉजिस्टिक क्षेत्र में ट्रेंड लोगों की कमी है। इस एकेडमी के माध्यम से लॉजिस्टिक कंपनियों के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को ट्रेंड किया जा सकेगा। कुलपति डा. राज नेहरू ने बताया कि इस एकेडमी के माध्यम से आठवीं और दसवीं पास उन युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस हैं। उन्हें लॉजिस्टिक स्किल एकेडमी में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए लॉजिस्टिक सेक्टर की जरूरत के हिसाब से कोर्स डिजाइन किया जाएगा।

कुलपति डा. राज नेहरू ने बताया कि जल्दी ही श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय और टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस कंपनी के बीच एक एमओयू होगा। इसके माध्यम से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की प्लेसमेंट का रास्ता साफ हो जाएगा। टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस के रीजनल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ऋषि दीवान ने कहा कि श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय अलग-अलग स्किल जोड़ रहा है। इसी कड़ी में लॉजिस्टिक स्किल एकेडमी अपने आप में एक नया अध्याय होगा। इसके माध्यम से युवा शक्ति को प्रशिक्षित करके उसकी ऊर्जा का देश हित में सदुपयोग होगा।

बैठक में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. आर.एस. राठौड़ और स्किल इनोवेटर्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. जॉय कुरियाकोजे, डीन प्रो. आशीष श्रीवास्तव, प्रो. सुरेश कुमार, इंडस्ट्री इंटीग्रेशन के संयुक्त निदेशक विनीत सूरी, प्रो. डी.के. गंजू और प्रो. ए.के. वाटल भी उपस्थित थे।

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