अस्पताल का 20 करोड़ का प्रस्ताव दो साल से लटका
पालघर : बोईसर में 30 बेड के ग्रामीण अस्पताल की स्वीकृति के बावजूद अस्पताल बनाने के लिए सरकार से फंड नहीं मिल रहा है। अस्पताल के लिए आवश्यक बीस करोड़ का प्रस्ताव दो साल से सरकार के पास धूल फांक रहा है। शहर में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। आबादी दो लाख के करीब है। यहां एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र शुरू किया गया था, लेकिन जर्जर होने के बाद इसे बंद कर टीम भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। यहां के ग्रामीण अस्पताल की दुर्दशा को देखते हुए प्रशासन व विधायक राजेश पाटिल ने नए अस्पताल के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। अंत में संजय नगर क्षेत्र में डेढ़ एकड़ सरकारी भूमि पर 30 बिस्तरों का ग्रामीण अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया। आज तीन साल हो गए हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने इस अस्पताल के निर्माण के लिए फंड उपलब्ध नहीं कराया है। इसलिए अस्पताल का काम शुरू करने का मकसद ठप है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल के कार्यों का बजट शासन को प्रशासनिक स्वीकृति एवं वित्त पोषण स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है।
मरीजों को होती है परेशानी
बोईसर विधानसभा क्षेत्र से बहुजन विकास अघाड़ी के राजेश पाटिल विधायक हैं। उनके प्रयास से अस्पताल के लिए डेढ़ एकड़ जमीन स्वीकृत हुई। पाटिल ने फंड हासिल करने के लिए सरकार से पत्राचार भी किया है। सरकार को बहुजन विकास अघाड़ी का समर्थन प्राप्त है। इसके बावजूद राशि स्वीकृत नहीं होने से वे अचंभित हैं। बोईसर क्षेत्र में आधुनिक सरकारी अस्पताल नहीं है। मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पालघर, मुंबई, गुजरात जाना पड़ता है। रात में जब मरीजों को इलाज की जरूरत होती है तो इलाज कराने में काफी परेशानी होती है। इसके बाद निजी अस्पताल के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
बैकलॉग के तहत अस्पताल के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत होने की उम्मीद है। स्वीकृति के बाद ही निर्माण किया जा सकेगा। -डॉ. संजय बोडाडे, जिला सर्जन, पालघर


