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New York : कोलंबिया विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने डाटा का किया विश्लेषण

New York: Columbia University experts analyzed data

न्यूयॉर्क : (New York) दुनिया भर में बढ़ती गर्मी के कारण करोड़ों लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ेगा। हाल ही में इस संबंध में अमेरिका स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय (Columbia University) के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन किया है। इसमें पाया गया है कि इस सदी के अंत तक (साल 2100) जलवायु परिवर्तन की वजह से 1.1 बिलियन (110 करोड़) से ज्यादा लोग गंभीर खाद्य संकट और भुखमरी का शिकार हो सकते हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डाटा और एआई मॉडल (data and AI models) का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की गई कि बदलता तापमान और बारिश का बिगड़ता पैटर्न हमारी भोजन की थाली पर क्या असर डालेगा। इस संकट का सबसे दुखद हिस्सा यह है कि प्रभावित होने वाले 110 करोड़ लोगों में से 60 करोड़ से ज्यादा बच्चे होंगे। अनुमान है कि 20 करोड़ नवजात शिशु अपने जीवन के पहले साल में ही भूख का सामना करेंगे। भविष्य में भूख का सबसे ज्यादा बोझ अफ्रीका और एशिया के देशों पर पड़ेगा। अकेले अफ्रीका में 2099 तक 17 करोड़ लोग दाने-दाने को मोहताज हो सकते हैं। साल 2011 में गंभीर भूख का सामना करने वाले लोगों की संख्या 5 करोड़ थी, जो 2020 तक बढ़कर 15 करोड़ हो गई। यह रफ्तार दिखाती है कि हालात कितनी तेजी से बिगड़ रहे हैं।

अभी सब खत्म नहीं हुआ
भले ही आंकड़े डराने वाले हैं, लेकिन इसी एआई मॉडल ने एक उम्मीद की किरण भी दिखाई है। ये आंकड़े केवल तभी सच होंगे जब हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। अगर दुनिया भर की सरकारें और बड़ी इंडस्ट्रीज कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती करती हैं, तो इस खतरे को आधे से भी ज्यादा कम किया जा सकता है।

भविष्य की उम्मीदें
अगर दुनिया झगड़ों और असमानता को छोड़कर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (development that does not harm the environment) की ओर बढ़ती है, तो 2100 तक 78 करोड़ लोगों को भुखमरी से बचाया जा सकता है।

अगर हम संभल गए, तो भविष्य होगा सुरक्षित
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन एक प्राकृतिक आपदा से ज्यादा एक पॉलिसी संकट है। हमारे आज के फैसले यह तय करेंगे कि आने वाली पीढ़ी भूखी रहेगी या सुरक्षित। कोयला, पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों को जलाना बंद करके हमें तेजी से ‘ग्रीन एनर्जी’ की ओर बढ़ना होगा। खेती के ऐसे तरीके अपनाने होंगे जो सूखे और बेमौसम बारिश की मार झेल सकें। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झगड़ों को कम करना होगा ताकि संसाधनों का सही इस्तेमाल लोगों का पेट भरने में हो सके। यह एआई मॉडल डराने के लिए नहीं, बल्कि जगाने के लिए बनाया गया है।

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