
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया संकट के बीच विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को 6.3 फीसदी से बढ़ाकर 6.6 फीसदी कर दिया है। ये वृद्धि दर मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक मजबूती का संकेत है, जबकि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था विकास की राह पर है।
विश्व बैंक ने गुरुवार को जारी अपने ताजा दक्षिण एशिया इकोनॉमिक अपडेट में बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6 फीसदी की दर से बढ़ सकती है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 7.1 फीसदी से ज्यादा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक इस ग्रोथ को मजबूत घरेलू मांग और एक्सपोर्ट का सपोर्ट मिलेगा।
विश्व बैंक ने अपनी ‘दक्षिण एशिया इकोनॉमिक अपडेट’ (South Asia Economic Update) रिपोर्ट में कहा कि मजबूत घरेलू मांग और एक्सपोर्ट में मजबूती के चलते भारत की ग्रोथ वित्त वर्ष 2024-25 के 7.1 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026) में 7.6 फीसदी होने का अनुमान है।
अपनी रिपोर्ट में विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को थोड़ा बढ़ाकर 6.6 फीसदी कर दिया है। हालांकि, विश्व बैंक ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में कंज्यूमर डिमांड बढ़ेगी, लेकिन पश्चिम एश्यिाा से पैदा होने वाली रुकावटें ग्रोथ को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) (MPC) की समीक्षा बैठक में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो विश्व बैंक के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है। भारत के ग्रोथ अनुमान में बढ़ोतरी की मुख्य वजह देश में मजबूत घरेलू मांग और बेहतर एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस को माना गया है।


