
नई दिल्ली : (New Delhi) घरेलू शेयर बाजार (domestic stock market) में मचे हाहाकार के बीच आज रुपया भी रिकॉर्ड स्तर तक नीचे गिर गया। अमेरिकी डॉलर की तुलना में अभी तक के सबसे निचले स्तर 92.02 पर रुपया खुला। इस तरह कारोबार की शुरुआत होते ही रुपया डॉलर की तुलना में 55 पैसे फिसल कर पहली बार 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के नीचे आ गया। इसके पहले पिछले कारोबारी दिन सोमवार को रुपया डॉलर की तुलना में 91.47 के स्तर पर बंद हुआ था। आज के पहले इसी साल जनवरी में भी भारतीय मुद्रा 91.98 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गई थी।
इंटर बैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (interbank foreign exchange market) में कारोबार की शुरुआत होने के बाद से ही रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता गया। कारोबार शुरू होने के कुछ देर बाद ही भारतीय मुद्रा 92.30 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गई। हालांकि बाद में इसकी स्थिति में मामूली सुधार भी हुआ। डॉलर की मांग में मामूली गिरावट आने के कारण दोपहर 12 बजे भारतीय मुद्रा 77 पैसे की कमजोरी के साथ 92.25 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रही थी।
मुद्रा बाजार के अभी तक के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पौंड (British pound) (GBP) के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन किया। वहीं यूरो के मुकाबले रुपये के भाव में आज तेजी दर्ज की गई। दोपहर 12 बजे तक के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (GBP) की तुलना में रुपया 1.14 रुपये की कमजोरी के साथ 122.79 के स्तर पर पहुंच गया था। इसके विपरीत यूरो की तुलना में रुपया 43.12 पैसे की मजबूती के साथ 106.90 के स्तर पर पहुंच कर कारोबार कर रहा था।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार तेजी और पश्चिम एशिया के संकट की वजह से रुपये पर दबाव काफी बढ़ गया है। निवेशक सेफ हेवन एसेट्स में अपना पैसा लगाना चाहते हैं। सोना और चांदी के अलावा डॉलर को भी सेफ हेवन माना जाता है। खासकर, डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के कारण निवेशकों का डॉलर के प्रति रुझान भी बढ़ा है। आज डॉलर इंडेक्स 14 प्रतिशत मजबूत होकर 99.22 के स्तर पर आ गया है। दूसरी ओर, बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी के भाव में गिरावट आई है। इस वजह से भी निवेशकों ने डॉलर में अपना निवेश बढ़ा दिया है। इसकी वजह से दूसरी अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं की तुलना में डॉलर में ज्यादा तेजी आ गई है।
कैपेक्स सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ वासुदेव परमार (Vasudev Parmar, CEO of Capex Securities & Financial Services) का कहना है कि ईरान संकट के बाद तेल की कीमतों में तेजी आने की वजह से भी रुपये की कीमत में गिरावट का रुख बना है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी से डॉलर की मांग में इजाफा होना तय है। इसके कारण इंपोर्ट कॉस्ट में भी बढ़ोतरी होगी। बढ़ते इंपोर्ट कॉस्ट की चिंताओं ने रुपये पर और भी ज्यादा दबाव बना दिया है। परमार का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचा, तो रुपये की कीमत और भी नीचे आ सकती है। ऐसी स्थिति में अगर भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो रुपये की स्थिति में जल्द सुधार होने की उम्मीद नहीं है।


