
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट (Delhi’s Rouse Avenue Court) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा (Robert Vadra) को बतौर आरोपित समन जारी करने के मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज सुशांत चंगोट्रा (Special Judge Sushant Changotra) ने 15 अप्रैल को फैसला सुनाने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा ने कहा है कि उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है। रॉबर्ट वाड्रा की ओर से पेश वकील ने कहा कि ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना चाहिए।
कोर्ट ने 2 अगस्त 2025 को वाड्रा समेत इस मामले के 10 आरोपितों को समन जारी किया था। 17 जुलाई 2025 को ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ हरियाणा के शिकोहपुर भूमि से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें वाड्रा और 10 अन्य लोगों के नाम हैं। उनकी कंपनी, मेसर्स स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा.लि. का नाम भी है। ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनी की 37.64 करोड़ की 43 संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले (money laundering case) में जब्त किया है।
इस मामले की शुरुआत 2008 में हुई थी। गुरुग्राम के शिकोहपुर में जमीन का सौदा हुआ था। स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी (Skylight Hospitality) ने साढ़े तीन एकड़ जमीन मात्र साढ़े सात करोड़ रुपये में खरीदी थी। वाड्रा इस कंपनी में डायरेक्टर थे। यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज (Omkareshwar Properties) से खरीदी गई थी। इस जमीन का मालिकाना हक सिर्फ 24 घंटे में ही वाड्रा की कंपनी के नाम पर हो गया। स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी (Skylight Hospitality) ने 2012 में वही जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। इससे कंपनी को बहुत ज्यादा मुनाफा हुआ। इस मामले में 2018 में एक एफआईआर दर्ज की गई थी।


