
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के जुडिशियल मजिस्ट्रेट(Judicial Magistrate of Delhi’s Rouse Avenue Court) को निर्देश दिया है कि वो बैंकों और बिल्डरों की ओर से नापाक गठजोड़ कर घर खरीदारों को फंसाने के मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर आगे की कार्रवाई करें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी राजीव जैन की विस्तृत रिपोर्ट पर गौर करने के बाद ये आदेश दिया।
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट (Amicus Curiae’s report) में सात बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की ओर से कई गई कार्रवाई का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है किस तरह बैंकों और बिल्डरों के नापाक गठजोड़ से घर खरीददारों पर दबाव बनाया जाता है। कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया कि वो अपनी रिपोर्ट सीबीआई को भी सौंपें। कोर्ट ने फ्लैट खरीददारों के वकीलों को निर्देश दिया कि वे एक हफ्ते के अंदर ये बताएं कि फ्लैट खरीददारों ने कितना लोन लिया है और कितने की किश्त जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि इस मामले में जब उनकी जांच खत्म हो जाए तो वे जांच की रिपोर्ट एमिकस क्यूरी को भी उपलब्ध कराएं।
बतादें कि 23 सितंबर 2025 को कोर्ट ने बैंकों और बिल्डरों की ओर से नापाक गठजोड़ कर घर खरीदारों को फंसाने के मामले में सीबीआई छह व एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि सुपरटेक को छोड़कर विभिन्न बिल्डरों के प्रोजेक्ट को लेकर मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और प्रयागराज में जांच पूरी कर ली है। कोर्ट ने कहा था कि तथ्यों को देखने पर साफ लगता है कि संज्ञेय अपराध घटित हुआ है। ऐसे में एफआईआर कर आगे की जांच जरुरी है। कोर्ट ने ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि वो सीलबंद लिफाफे की रिपोर्ट इस मामले के एमिकस क्यूरी राजीव जैन को उपलब्ध कराएं।
बता दें कि कोर्ट ने 22 जुलाई 2025 को सीबीआई को दिल्ली-एनसीआर में 22 एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देते हुए दिल्ली-एनसीआर के बाहर के बिल्डरों और बैंकों के बीच नापाक गठजोड़ की जांच करने को कहा था। 29 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बिल्डरों और बैंकों के बीच के गठजोड़ की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
दरअसल, उच्चतम न्यायालय के समक्ष दिल्ली-एनसीआर के काफी फ्लैट खरीददारों ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम जैसे इलाकों में सुपरटेक और दूसरे बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स में फ्लैट बुक कराये थे। फ्लैट खरीददारों ने ये बुकिंग सबवेंशन स्कीम के तहत कराई थी जिसके तहत बैंक बिल्डर को 60 से 70 फीसदी लोन की रकम सीधे दे देते थे लेकिन ये फ्लैट समय पर नहीं बने और अब बैंक उनके ईएमआई वसूल रहे हैं, जबकि उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला।
कोर्ट ने इस मामले में यूपी और हरियाणा के डीजीपी को निर्देश दिया था कि वे सीबीआई (Directors General of Police of Uttar Pradesh and Haryana) को डीएसपी, इंस्पेक्टर और कांस्टेबल की सूची दें ताकि एसआईटी का गठन किया जा सके। कोर्ट ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और शहरी कार्य मंत्रालय, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया और रिजर्व बैंक को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।


