
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज जस्टिस यशवंत वर्मा (Allahabad High Court Judge Justice Yashwant Verma) को उनके पद से हटाने के लिए लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित कमेटी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta) की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
जस्टिस वर्मा का कहना है कि जब 21 जुलाई को लोकसभा और राज्यसभा में जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था तो ऐसी सूरत में जजेज इन्क्वारी एक्ट के तहत आगे जांच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त कमेटी का गठन होना चाहिए था। ऐसे में लोकसभा स्पीकर की ओर से कमेटी का गठन होना गलत है।
जस्टिस वर्मा की याचिका में कहा गया है कि जजेज इन्क्वायरी में साफ तौर पर उल्लेख है कि अगर किसी जज को हटाने का प्रस्ताव एक ही दिन में संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है, तो तब तक कोई कमेटी का गठन नहीं होगा, जब तक संसद के दोनों सदन इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर लेते। संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार किये जाने के बाद स्पीकर और चैयरमेन एक संयुक्त कमेटी का गठन करेंगे। जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma) का कहना है कि जब उन्हें हटाने का प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में एक ही दिन पेश हुआ, तो राज्यसभा में उस पर कोई फैसला न लिए जाने पर भी लोकसभा स्पीकर ने कैसे कमेटी का गठन कर दिया।
उच्चतम न्यायालय ने 22 मार्च को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी के गठन का आदेश दिया था। इस जांच कमेटी में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया (Chief Justice G.S. Sandhawalia) और कर्नाटक उच्च न्यायालय के जज जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे। जस्टिस यशवंत वर्मा जब दिल्ली उच्च न्यायालय के जज थे उस समय उनके घर पर 14 मार्च को आग लगने के बाद अग्निशमन विभाग ने कैश बरामद किया था।


