नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय (The Supreme Court) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत बिना चार्जशीट के हिरासत में रखने पर हैरानी जाहिर करते हुए इसे भयावह बताया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम की जेल में पिछले दो साल से बंद आरोपित को जमानत देते हुए ये टिप्पणी की। इस दाैरान कोर्ट ने असम सरकार को (Assam government) जमकर फटकार भी लगाई और सवाल उठाया कि आप खुद को देश की सबसे बड़ी एजेंसी समझते हैं।
दरअसल, असम के टोनलांग कोन्याक (Tonlang Konyak of Assam) ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका के मुताबिक टोनलांग पिछले दो साल से यूएपीए के तहत जेल में बंद हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने असम सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि यूएपीए की धारा 43डी के तहत चार्जशीट दाखिल करने का समय कोर्ट के आदेश से अधिकतम 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में आरोपित को बिना चार्जशीट दाखिल किए ही दो साल से अधिक समय से हिरासत में रखा गया है।
कोर्ट ने साफ किया कि चाहे कितने भी कड़े नियम हों, यूएपीए ऐसी कार्रवाई को नहीं रोकता जिससे गैरकानूनी हिरासत की स्थिति पैदा हो। दो साल से असम सरकार चार्जशीट दाखिल नहीं कर रही है और आरोपित को हिरासत में रखा। क्या आप खुद को देश की सबसे बड़ी एजेंसी समझते हैं।


