नई दिल्ली : (New Delhi) सुप्रीम कोर्ट (The Supreme Court) ने 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट के मामले में 12 (Bombay High Court’s decision to acquit 12 accused in the 2006) आरोपितों को बरी किए जाने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। आज महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस याचिका को चीफ जस्टिस बीआर गवई की (Chief Justice BR Gavai) अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की गई तो चीफ जस्टिस ने कहा कि इसमें जल्दबाजी क्या है। इस मामले में पहले ही आठ लोगों की रिहाई हो चुकी है।
दरअसल, सितंबर 2015 में निचली अदालत ने पांच को मौत की सजा और सात को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस सजा को आरोपितों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को फैसला सुनाते हुए 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट मामले में 12 आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है। मुंबई की लोकल ट्रेनों में 7 बम धमाकों में कुल 189 लोगों की मौत और 820 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।


