
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)ने एक यूट्यूबर की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय की ओर से उसके खिलाफ लगाई गई जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग की गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता सावुक्कू शंकर (etitioner, Savukku Shankar) हर हफ्ते उच्चतम न्यायालय आ जा रहा है। वो अपने लैपटॉप के रिलीज के लिए मजिस्ट्रेट के पास नहीं जा रहा है। उसका फोन जब्त हो गया है तो वो उच्चतम न्यायालय आ रहा है।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को गुण-दोष के आधार पर जमानत नहीं मिली है बल्कि स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिली है। लेकिन जमानत पर जाने के बाद भी उसने वीडियो और रील बनाना शुरु कर दिया और उन्हें यूट्यूब पर डालना शुरु कर दिया। जमानत देने का ये मतलब नहीं था। याचिकाकर्ता अपनी स्वतंत्रता का बेजा फायदा उठा रहा है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की जमानत निरस्त नहीं हुई बल्कि शर्तें लगाई गई हैं। इन शर्तों में लंबित केसों के बारे में बात नहीं करने को कहा गया था लेकिन आप लंबित केसों के बारे में बातें कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा (senior advocate Siddharth Luthra) ने कहा कि पुलिस को जांच के लिए याचिकाकर्ता के मोबाइल फोन की जरुरत है जो उसने नहीं दिया। तमिलनाडु सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता जमानत से बाहर आने के बाद फिर वीडियो बनाने लगा और इलाज के लिए अस्पताल तक नहीं गया।
बता दें कि 26 दिसंबर 2025 को मद्रास उच्च न्यायालय ने शंकर को 17 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दी थी।


