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New Delhi : सूफी संगीत एक साझा विरासत है, जिसे हम सभी जीते आ रहे हैंः प्रधानमंत्री

नई दिल्ली : (New Delhi)प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शाम यहां आयोजित सूफी म्यूजिक फेस्टिवल जहान-ए-खुसरो में शामिल हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सूफी संगीत एक साझा विरासत है, जिसे हम सभी जीते आ रहे हैं। यहां प्रस्तुत ‘नजर-ए-कृष्ण’ में हमने अपनी साझा विरासत की झलक देखी। जहान-ए-खुसरो के इस कार्यक्रम में एक अलग ही खुशबू है। यह खुशबू हिंदुस्तान की मिट्टी की है।

उन्होंने कहा कि आज जहान ए खुसरो कार्यक्रम में आकर मन खुश होना बहुत स्वाभाविक है। हजरत अली खुसरो जिस बसंत के दीवाने थे। वो बसंत आज यहां दिल्ली में मौसम है ही नहीं बल्कि जहान ए खुसरो के आबो हवा में जुड़ा हुआ है। हजरत ए खुसरो के शब्दों में कहें तो, “सकल बन फूल रही सरसों/अम्बवा फूटे, टेसू फूले/कोयल बोले डार-डार…” यहां माहौल वाकई कुछ ऐसा ही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की सभ्यता, उसकी तहजीब को स्वर उसके गीत-संगीत से मिलते हैं। उसकी अभिव्यक्ति कला से होती है। हजरत खुसरो ने भारत को उस दौर की दुनिया के तमाम बड़े देशों से महान बताया। उन्होंने संस्कृत को दुनिया की सबसे बेहतरीन भाषा बताया। वो भारत के मनीषियों को बड़े-बड़े विद्वानों से भी बड़ा मानते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में सूफी परंपरा ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। सूफी संतों ने खुद को मस्जिद और खानकाहों तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने पवित्र कुरान के हर्फ पढ़े तो वेदों के शब्द भी सुने, उन्होंने अज़ान की सदा में भक्ति के गीतों की मिठास को जोड़ा।

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