
नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) ने कहा है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए एक बार फिर स्कूलों को समाज से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि व्यवस्था और शिक्षकों का वेतन सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन स्कूलों के संचालन और समग्र विकास में समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रधान ने यह बात शुक्रवार को ‘समग्र शिक्षा’ को नए सिरे से परिकल्पित करने पर आयोजित परामर्श बैठक को संबोधित करते हुए कही।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) (NEP) 2020 के क्रियान्वयन के पांच वर्ष पूरे होने के बाद वर्ष 2026-27 में देश ‘समग्र शिक्षा’ के एक नए प्रारूप की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन तैयार करना आज सबसे बड़ी चुनौती है। भारत की बड़ी आबादी समग्र शिक्षा से अपेक्षाएं रखती है और शिक्षा के माध्यम से न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए राज्यों के पास अपने-अपने अनुभव और श्रेष्ठ प्रथाएं मौजूद हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सीखने के परिणाम (लर्निंग आउटकम) और पोषण परिणामों में सुधार, परीक्षा के बोझ को कम करना, शिक्षा को सहज बनाना, कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना, स्कूलों का समग्र विकास, तकनीक और डिजिटलीकरण जैसे अनेक घटकों के सार्थक रूपांतरण के लिए समाज की भूमिका को फिर सशक्त करना होगा।
उन्होंने कहा कि जब हम समग्र शिक्षा के नए प्रारूप की ओर बढ़ रहे हैं, तो यह भी सोचना होगा कि सरकार और समाज मिलकर इसकी जिम्मेदारी कैसे निभाएं। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक सामूहिक प्रयास होना चाहिए, जिसे राष्ट्रीय आंदोलन (Education Minister) का रूप दिया जाए।
बैठक में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने 2047 तक विकसित भारत का जो विजन रखा है, वह तभी साकार होगा जब देश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन हासिल किया जाए। उन्होंने सीखने की खाइयों को कम करने, ड्रॉपआउट घटाने, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, बच्चों में रचनात्मक दृष्टिकोण और महत्वपूर्ण कौशल विकसित करने तथा ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से बाहर निकालने पर जोर दिया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब समग्र शिक्षा को केवल पहुंच आधारित योजना से आगे बढ़ाकर एक परिणाम-आधारित, गुणवत्ता-केंद्रित ढांचे में बदलने की जरूरत है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप हो। उन्होंने सभी शैक्षणिक विशेषज्ञों, मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और भागीदार राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से 2026-27 के लिए एक समग्र वार्षिक शैक्षणिक योजना (annual education plan) तैयार करने का आह्वान किया।


