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New Delhi : स्वदेशी की जनचेतना जगाने वाले राजीव दीक्षित का वर्ष 2010 में निधन

नई दिल्ली : (New Delhi) गौहत्या रोकने, स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल, आयुर्वेद के प्रबल हिमायती (strong advocate of Ayurveda) सहित दूसरे अहम मुद्दों पर राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए महत्वपूर्ण अभियानों का संचालन करने वाले राजीव दीक्षित का 30 नवम्बर 2010 को दिल का दौरा पड़ने के बाद पहले भिलाई के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, उसके बाद अपोलो बीएसआर अस्पताल (Apollo BSR Hospital) में दाखिल कराया गया। उन्हें दिल्ली ले जाने की तैयारी की जा रही थी लेकिन इसी दौरान स्थानीय डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाबा रामदेव ने उन्हें भारत स्वाभिमान (National General Secretary of Bharat Swabhiman) (ट्रस्ट) के राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा था, जिस पद पर वे अपनी मृत्यु तक रहे।

राजीव दीक्षित का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में 30 नवम्बर 1967 को हुआ था। उन्होंने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल से प्राप्त की। इसके उपरान्त उन्होंने इलाहाबाद के जे.के इंस्टीटयूट से बी.टेक. और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से एम. टेक. (M.Tech from the Indian Institute of Technology) की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कुछ समय भारत सीएसआईआर (Council of Scientific and Industrial Research) में भी कार्य किया।

राजीव दीक्षित ने विदेशी कंपनियों और भारत में चल रहे अँग्रेजी कानूनों के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi movement) की शुरुआत की। राष्ट्र में पूर्ण स्वतंत्रता और उसे आर्थिक महाशक्ति के रुप में खड़ा करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया। वो गाँव-गाँव, शहर-शहर घूम कर स्वदेशी को लेकर जनजागरण (awareness about Swadeshi) शुरु किया। सन् 1999 में स्वदेशी पर उनके व्याख्यानों की कैसेट समूचे देश में काफी रुचि के साथ सुनी गई। यह सिलसिला आजतक थमा नहीं है। उन्होंने पूरे जीवन मे देशभर में घूम-घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये। सन 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया पर आज भी उनके व्याख्यानों को बहुत दिलचस्पी के साथ सुनने वाले लाखों लोग हैं।

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