spot_img

New Delhi : वायु प्रदूषण पर एनसीएपी पर उठे सवाल : जयराम रमेश

New Delhi: Questions raised on NCAP regarding air pollution: Jairam Ramesh

नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) (NCAP) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (Centre for Research on Energy and Clean Air) (CREA) के नए विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि भारत में वायु प्रदूषण अब एक संरचनात्मक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। रमेश ने कहा कि इस पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया नाकाफी और अप्रभावी है।

जयराम रमेश ने जारी पत्र में कहा कि सैटेलाइट डेटा पर आधारित अध्ययन से स्पष्ट होता है कि देश के लगभग 44 प्रतिशत शहर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। आकलन किए गए 4,041 वैधानिक नगरों में से 1,787 शहरों में वर्ष 2019 से 2024 के बीच, 2020 को छोड़कर, लगातार पांच वर्ष तक पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 का वार्षिक स्तर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर दर्ज किया गया। इसके बावजूद एनसीएपी के तहत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है, जो कुल गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों का महज चार प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि इन 130 शहरों से 28 में अब तक निरंतर परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन भी स्थापित नहीं किए गए हैं। 102 शहरों में निगरानी व्यवस्था है, उनमें से 100 शहरों में पीएम 10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज किया गया। इससे एनसीएपी की सीमाओं और अक्षमता का खुलासा होता है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (National Clean Air Programme) के रूप में प्रचारित एनसीएपी की तत्काल गहन समीक्षा की आवश्यकता है। एयर पॉल्यूशन कंट्रोल एंड प्रिवेंशन एक्ट 1981 और वर्ष 2009 में लागू नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स की पूरी तरह से पुनर्समीक्षा की जाए। जहां राष्ट्रीय मानक पीएम 2.5 के लिए 24 घंटे में 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और वार्षिक स्तर पर 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा तय करते हैं, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देश इससे कहीं अधिक सख्त हैं।

कांग्रेस नेता रमेश (Congress leader Ramesh) ने कहा कि एनसीएपी के तहत फंडिंग में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी की जानी चाहिए। वर्तमान में एनसीएपी और 15वें वित्त आयोग के तहत लगभग 10,500 करोड़ रुपये 131 शहरों के लिए आवंटित हैं, जबकि वास्तविक जरूरत इससे 10 से 20 गुना अधिक है। उन्होंने एनसीएपी को कम से कम 25,000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम बनाकर देश के एक हजार सबसे प्रदूषित शहरों और कस्बों तक विस्तारित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि एनसीएपी में प्रदर्शन का पैमाना पीएम 2.5 को बनाया जाना चाहिए और ठोस ईंधन के जलने, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही कार्यक्रम को कानूनी आधार देते हुए मजबूत प्रवर्तन व्यवस्था विकसित करने और देश के हर शहर के लिए सशक्त डेटा निगरानी प्रणाली तैयार करने की जरूरत है।

कांग्रेस नेता ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए तय वायु प्रदूषण मानकों को तत्काल लागू करने और वर्ष 2026 के अंत तक सभी संयंत्रों में फ्लू गैस डी सल्फराइजर अनिवार्य रूप से स्थापित करने की मांग की। उन्होंने राष्ट्रीय हरित पंचाट (National Green Tribunal) की स्वतंत्रता बहाल करने और पिछले दस वर्ष में किए गए जन विरोधी पर्यावरण कानून संशोधनों को वापस लेने की मांग की है।

Asansol : गैस टैंकर ट्रेलर में लगे कैप्सूल सिलेंडर से गैस लीक होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित

आसनसोल : (Asansol) गोपालपुर से पानागढ़ औद्योगिक क्षेत्र (from Gopalpur to the Panagarh industrial area) जाने वाले रास्ते में एक गैस टैंकर ट्रेलर में...

Explore our articles