नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (The Delhi High Court) ने बीसीसीआई की टीम को प्रसार भारती, दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो की ओर से टीम इंडिया या भारतीय टीम इंडिया कहने पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय (Chief Justice DK Upadhyay) की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता और वकील रीपक कंसल को फटकार लगाते हुए कहा कि आप कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई द्वारा आयोजित क्रिकेट मैचों और सार्वजनिक प्रसारणकर्ता प्रसार भारती (broadcast by public broadcaster Prasar Bharati)की ओर से उनके प्रसारण के दौरान राष्ट्रीय झंडे या देश के नाम का इस्तेमाल करना किसी कानून का उल्लंघन नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आज कोई भी निजी व्यक्ति देश का झंडा फहरा सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि अगर आप अपने घर पर राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं तो कोई आपको रोकता है। इसमें कानून का कहां उल्लंघन होता है। कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई की टीम हर जगह जाती है और भारत का प्रतिनिधित्व करती है और आप कह रहे हैं कि वे भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
कंसल ने याचिका दायर कर कहा था कि बीसीसीआई एक निजी निकाय है और ये तमिलनाडु सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड (Tamil Nadu Societies Registration Act) किया गया है। ऐसे में बीसीसीआई की टीम को सार्वजनिक प्रसारणकर्ता प्रसार भारती की ओर टीम इंडिया कहना इसे आधिकारिक राष्ट्रीय दर्जा देने की तरह है। ऐसा करना बीसीसीआई को वाणिज्यिक तौर पर बेजा फायदा पहुंचाने जैसा है।
याचिका में कहा गया था कि बीसीसीआई अपने समारोहों और इवेंट में राष्ट्रीय झंडा और ‘इंडिया’ नाम का इस्तेमाल (BCCI uses the national flag and the name ‘India’ in its ceremonies and events) करती है। ऐसा करना एम्बलेम एंड नेम्स (प्रिवेंशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट और फ्लैग कोड ऑफ इंडिया का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि किसी निजी निकाय द्वारा बिना किसी वैधानिक अर्हता या नोटिफिकेशन के मनमाने तरीके से इस्तेमाल करना निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है।


