नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (The Delhi High Court)ने केंद्र सरकार और भारतीय वायु सेना (Central Government and the Indian Air Force) को 20 खाली पड़ी फ्लाइंग ब्रांच की जगहों में से एक पर एक महिला को नियुक्त करने का आदेश दिया है। जस्टिस सी हरिशंकर (Justice C Harishankar) की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक महिला याचिकाकर्ता की याचिका पर ये आदेश जारी किया।
महिला याचिकाकर्ता का कहना था कि वो महिलाओं के मेरिट लिस्ट में सातवें स्थान पर आयी (ranked seventh in the merit list of women) थी। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि कुल 90 रिक्त पदों में से 70 पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी गई और केवल दो महिलाओं की ही भर्ती की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर मौका मिलना चाहिए। महिला अभ्यर्थी वरिष्ठता समेत दूसरे लाभों में समानता के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि 92 में से महिलाओं को उनके लिए आरक्षित दो पदों पर नियुक्त कर दिया गया, लेकिन बचे 90 में से केवल 70 पुरुषों की ही नियुक्ति हुई है और 20 पदों पर कोई नियुक्ति नहीं की गई। तब बचे पदों पर सफल महिला अभ्यर्थी की नियुक्ति क्यों नहीं की जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और भारतीय वायु सेना (High Court rejected the argument of the Central Government) की उस दलील को खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता को ये पता था कि 92 में से केवल दो पद ही महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित था। केंद्र सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता उन पदों के लिए नियुक्ति की मांग नहीं कर सकती जो उनके लिए आरक्षित नहीं था। उच्च न्यायालय ने कहा कि सैन्य बलों में नियुक्तियों के लिए महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं बरता जा सकता है। वायु सेना में भर्ती का केवल एक मापदंड होना चाहिए कि उड़ान भरने में सक्षम हैं कि नहीं।


