
नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार ने नए आयकर (new income tax framework) ढांचे को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘आयकर अधिनियम, 2025’ (Income Tax Act, 2025) के नियम अधिसूचित कर दिए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) (Central Board of Direct Taxes) द्वारा जारी ये नियम 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे और वित्तीय वर्ष 2026-27 पर लागू किए जाएंगे।
नया कानून 64 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, भाषा को स्पष्ट करना और विवादों को कम करना है। अधिसूचना के अनुसार इसे ‘आयकर नियम, 2026’ नाम दिया गया है।
संरचनात्मक बदलावों के तहत कानून को काफी संक्षिप्त किया गया है। धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 और अध्याय 47 से कम कर 23 कर दिए गए हैं। शब्दों की संख्या भी लगभग आधी कर दी गई है। जटिल प्रावधानों की जगह स्पष्टता बढ़ाने के लिए नई तालिकाएं और सूत्र शामिल किए गए हैं।
एचआरए पर मिलने वाली छूट बरकरार
नए नियमों में वेतनभोगियों के लिए मकान किराया भत्ता (एचआरए) पर कर छूट का दायरा बरकरार रखते हुए पारदर्शिता बढ़ाई गई है। अब किरायेदार को मकान मालिक से अपने संबंधों का खुलासा करना अनिवार्य होगा। महानगरों—मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु—में 50 प्रतिशत तक छूट की सीमा यथावत रहेगी, जबकि अन्य शहरों में यह 40 प्रतिशत रहेगी।
लेखा परीक्षकों की बढ़ाई गई जवाबदेही
इसके अलावा पूंजीगत लाभ, शेयर बाजार लेनदेन और अनिवासी कराधान को लेकर नियमों को सख्त किया गया है, जबकि रिटर्न और खुलासा प्रणाली को सरल बनाने का प्रयास किया गया है। 150 से अधिक नए फॉर्म भी पेश किए गए हैं।
नए प्रावधानों के तहत विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट, पैन के दुरुपयोग और ऑडिट टिप्पणियों से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर कंपनियों और लेखा परीक्षकों की जवाबदेही बढ़ाई गई है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाएगा।


