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New Delhi : एआई शिखर सम्मेलन में ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताओं’ की घोषणा

New Delhi: "New Delhi Frontier AI Impact Commitments" announced at AI Summit

नई दिल्ली : (New Delhi) भारत एआई शिखर सम्मलेन के दौरान गुरुवार को ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताओं’ (New Delhi Frontier AI Impact Commitments) की घोषणा की गई जिनका उद्देश्य एआई को समावेशी, विकासोन्मुखी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक बनाना है।

दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ के दौरान केन्द्रीय, रेल, सूचना प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने दुनिया के देशों और बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों के समक्ष आज इसकी घोषणा की।

इस प्रतिबद्धता को साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) ने कार्यक्रम के दौरान गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन, मेटा के चीफ एआई ऑफिसर एलेक्जेंडर वांग और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई सहित वैश्विक तकनीकी जगत के दिग्गजों के साथ शिरकत की।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत एआई इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit) की सफलता का प्रमाण ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएं’ है। इसके तहत दो मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें पहला, डेटा के माध्यम से रोजगार और आर्थिक बदलावों के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाना और दूसरा, एआई प्रणालियों को बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। यह पहल विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देश) के लिए एआई को समावेशी और प्रासंगिक बनाने की दिशा में भारत के नेतृत्व को दर्शाती है।

उल्लेखनीय है कि मंत्री ने सम्मेलन के तीसरे दिन (बुधवार) भारत के एआई गवर्नेंस विज़न का अनावरण किया। इस दौरान सम्मेलन के कार्य समूहों के प्रमुख लक्ष्यों पर चर्चा हुई, जिसने वैश्विक एआई प्राथमिकताओं पर सहयोगात्मक कार्रवाई के लिए मंच तैयार किया। उन्होंने जिम्मेदार नवाचार के लिए भारत का दृष्टिकोण वैश्विक एआई यात्रा के लिए मार्गदर्शक बताया।

इस दौरान उन्होंने कहा था, “जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं और इस शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे को निर्धारित करने में सात विषयगत कार्य समूहों के निष्कर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। ये परिणाम रोडमैप के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेंगे। साथ ही सहयोग नवाचार और एक उत्तरदायी एआई इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा भी तय करेंगे।”

सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “एआई के प्रति हमारा दृष्टिकोण ‘सतर्कतापूर्ण उत्साह’ का है। हम इसके जोखिमों और नियमों के प्रति सजग हैं। हम जोखिम प्रबंधन और वैश्विक मानकों को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि एक ऐसा समावेशी गवर्नेंस ढांचा तैयार हो सके जिसमें ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) सहित सभी देशों की आवाज को सशक्त बनाया जा सके।”

सात विषयगत चक्र वैश्विक विशेषज्ञता और साझा दृष्टिकोणों को क्रियात्मक ढांचों में बदलने के भारत के प्रयासों को दर्शाते हैं। इनमें मानव पूंजी सामाजिक सशक्तिकरण सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई नवाचार तथा दक्षता विज्ञान, एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण शामिल हैं।

इन कार्य समूहों ने सरकार उद्योग शिक्षा जगत और नागरिक समाज के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर एआई के भविष्य का रोडमैप तैयार किया है। महीनों के परामर्श के बाद अब इन लक्ष्यों को कार्यान्वयन की ओर ले जाने की तैयारी है।

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