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New Delhi : संसद सत्र में शामिल होने के लिए सांसद इंजीनियर रशीद को 28 जनवरी से मिली इजाजत

New Delhi: MP Engineer Rashid granted permission to attend Parliament session from January 28

नई दिल्ली : (New Delhi) पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने टेरर फंडिंग मामले के आरोपित और सांसद इंजीनियर रशीद को संसद के बजट सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा ने इंजीनियर रशीद को 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक संसद के पूरे सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने 16 जनवरी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) (NIA) को नोटिस जारी किया था। नवंबर, 2025 में कोर्ट ने रशीद को संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी थी। इसके पहले कोर्ट ने इंजीनियर रशीद (Engineer Rashid) को सितंबर में हुए उप-राष्ट्रपति के चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने रशीद को 24 जुलाई से 4 अगस्त, 2025 तक संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी। इंजीनियर रशीद ने लोकसभा चुनाव 2024 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (former Jammu and Kashmir Chief Minister Omar Abdullah) को करीब एक लाख मतों से हराकर जीत हासिल की थी। राशिद इंजीनियर को 2016 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च, 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासिन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब अहमद शाह, अवतार अहम शाह, नईम खान, बशीर अहमद बट्ट ऊर्फ पीर सैफुल्ला समेत दूसरे आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था।

एनआईए के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया। 1993 में अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (All Parties Hurriyat Conference) की स्थापना की गई।

एनआईए के मुताबिक हाफिज सईद ने हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं के साथ मिलकर हवाला और दूसरे चैनलों के जरिये आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन का लेन-देन किया। इस धन का उपयोग वे घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षा बलों पर हमला करने, स्कूलों को जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का काम किया। गृह मंत्रालय को इसकी सूचना मिलने के बाद एनआईए ने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत केस दर्ज किया था।

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