
नयी दिल्ली: (New Delhi) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई ने बृहस्पतिवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा अनियमितताएं बरते जाने का आरोप लगाते हुए नए सिरे से मतदान की मांग की।भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि भाजपा पार्षदों की आपत्ति के बावजूद, ‘आप’ की नव-निर्वाचित महापौर शैली ओबेरॉय ने मतदान के दौरान सदस्यों को मतदान क्षेत्र में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति दी।उन्होंने यह दावा भी किया कि एमसीडी के सचिव ने अधिकारियों को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में भी नए सिरे से मतदान कराने की सिफारिश की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर ने ‘आप’ पार्षदों की ‘क्रॉस वोटिंग’ पर नजर रखने के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल की अनुमति दी।वर्मा ने दावा किया कि वोट डालने वाले ‘आप’ पार्षद तस्वीरें खींचकर पार्टी नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भेज रहे थे।चुनाव की प्रक्रिया बुधवार को शुरू हुई थी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया की अध्यक्षता कर रही महापौर द्वारा पार्षदों को मतदान के दौरान मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति दिए जाने का भाजपा ने विरोध किया। इस कारण चुनाव प्रक्रिया बाधित हुई।रात भर कई बार के स्थगन के बाद एमसीडी सदन की कार्यवाही को स्थायी समिति के सदस्यों का चयन किए बिना बृहस्पतिवार सुबह दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
उत्तर पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया कि आप के नेतृत्व को अपने पार्षदों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की आशंका थी और इसलिए उसके महापौर ने वोट डालने के दौरान मोबाइल फोन की अनुमति दी।तिवारी ने ‘आप’ पार्षदों पर गुंडागर्दी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ‘आप’ पार्षदों ने भाजपा पार्षद प्रमोद गुप्ता को थप्पड़ मारा।उन्होंने कहा कि भाजपा, स्थायी समिति के चुनाव में पार्षदों को मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति देने के महापौर के फैसले का विरोध करती रहेगी।
तिवारी ने आप पार्षदों की ‘‘गुंडागर्दी’’ के लिए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने बुधवार को महापौर पद के चुनाव में भाजपा की हार के बाद ट्वीट करके इसे ‘‘गुंडों की हार’’ बताया था, जिससे ‘आप’ पार्षदों को उकसावा मिला।इस बीच, वर्मा ने आरोप लगाया कि चुनाव के लिए कुल 55 मतपत्र वितरित किए गए थे, जिनमें से 45 मतपत्र वोट डालने के लिए इस्तेमाल किए गए थे, जबकि शेष की कोई जानकारी नहीं है।उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी भाजपा पार्षद की उपस्थिति के बिना ही महापौर के निर्देश के बाद मतपेटी को सील कर दिया गया।


