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New Delhi : दस वर्षों में पीएम मुद्रा योजना के बांटे गए 32 लाख करोड़ के लोन, उद्यमिता क्रांति को बढ़ावा मिला

नई दिल्ली : (New Delhi) प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत 10 वर्षों में 32.61 लाख करोड़ रुपये मूल्‍य के 52 करोड़ से अधिक लोन दिए गए हैं।इस योजना से देशभर में उद्यमिता क्रांति को बढ़ावा मिला है। इससे व्यापार वृद्धि अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह छोटे शहरों और गांवों तक फैल रही है, जहां पहली बार उद्यमी अपने भाग्य की बागडोर संभाल रहे हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 8 अप्रैल, 2015 को की गई थी। तब से दस वर्षों के दौरान 32.61 लाख करोड़ रुपये के 52 करोड़ से ज्‍यादा लोन स्वीकृत किए गए हैं। यही वजह है कि लोग अब नौकरी चाहने वाले नहीं रह गए हैं, बल्कि वे नौकरी देने वाले बन रहे हैं। इस योजना से छोटे शहरों और गांवों तक कारोबार बढ़ाने में मदद मिली है। इस योजना से पहली बार कारोबार करने वाले लोगों को प्रोत्साहन भी मिला है। एसकेओसीएच की “आउटकम्स ऑफ मोदीनॉमिक्स 2014-24″ की रिपोर्ट के मुताबिक ”2014 से हर साल औसतन कम से कम 5.14 करोड़ व्यक्ति वर्ष रोजगार सृजित हुए हैं, जिसमें अकेले पीएमएमवाई ने 2014 से प्रति वर्ष औसतन 2.52 करोड़ स्थिर और टिकाऊ रोजगार जोड़े हैं। इस परिवर्तन का एक उदाहरण जम्मू-कश्मीर है, जिसे पीएम मुद्रा योजना के तहत अत्यधिक लाभ हुआ है और 20,72,922 मुद्रा लोन स्वीकृत किए गए हैं।”

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से महिलाओं को सशक्त बनाने में मिली मदद

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक ”इस योजना से महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद मिली और 70 फीसदी से अधिक लोन महिला उद्यमियों के द्वारा लिए गए हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता बढ़ी है। इसके साथ ही लैंगिक समानता में योगदान मिला है।” पीएम मुद्रा योजना के तहत पिछले नौ वर्षों में प्रति महिलाओं को दिए जाने वाले लोन राशि 13 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 62,679 रुपए हो गई। वहीं, प्रति महिला वृद्धिशील जमा राशि 14 फीसदी की सीएजीआर से बढ़कर 95,269 रुपये हो गई।

इस योजना ने 52 करोड़ से अधिक लोन खाते खोलने में मदद की

एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में पीएम मुद्रा योजना ने 52 करोड़ से अधिक लोन खाते खोलने में मदद की है, जो उद्यमशीलता गतिविधि में भारी उछाल को दर्शाता है। पीएम मुद्रा योजना के तहत किशोर लोन (50,000 से 5 लाख रुपये), जो बढ़ते व्यवसायों का समर्थन करते हैं, वित्त वर्ष 2016 में 5.9 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 44.7 फीसदी हो गए हैं, जो छोटे उद्योगों की वास्तविक प्रगति को दर्शाता है। तरुण श्रेणी (5 लाख से 10 लाख रुपये) भी तेजी से आगे बढ़ रही है, जो साबित करती है कि पीमए मुद्रा योजना केवल व्यवसाय शुरू करने के बारे में नहीं है, बल्कि उन्हें बढ़ाने में मदद करती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की सराहना की

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पीएम मुद्रा योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना जो महिला उद्यमिता पर विशेष ध्यान देने के साथ जमानत-मुक्त लोन प्रदान करती है, इसने महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई की संख्या को बढ़ाने में मदद की है, जो अब 28 लाख से अधिक हो गए हैं। इस योजना से पूरे देश में लोगों की जिंदगी बदल गई है। इस योजना ने सिलाई इकाइयों और चाय की दुकानों से लेकर सैलून, मैकेनिक की दुकानों और मोबाइल मरम्मत व्यवसायों तक, करोड़ों सूक्ष्म-उद्यमियों ने आत्मविश्वास के साथ कदम आगे बढ़ाया है, यह एक ऐसी प्रणाली के द्वारा सक्षम किया गया है, जो उनकी क्षमता में विश्वास करती है। पीएमएमवाई ने गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को संस्थागत ऋण प्रदान करके इन यात्राओं का समर्थन किया है जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) का उद्देश्य वित्तपोषित न होने वाले सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों को वित्तपोषित करना है। इस योजना से देशभर के छोटे शहरों और गांवों तक कारोबार बढ़ाने में मदद मिली है। इससे पहली बार कारोबार करने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिला है। उद्यमियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु और सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख रुपये तक के जमानत-मुक्त ऋण प्रदान करने के लिए 8 अप्रैल, 2015 में यह योजना शुरु की गई थी। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों को तीन श्रेणियों में शिशु (50,000 रुपये तक), किशोर (50,000 से 5 लाख रुपये तक) और तरुण (5 लाख से 10 लाख रपये तक) लोन मिलता है।

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