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New Delhi : दिल्ली दंगा मामले में कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच का आदेश रद्द

नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा (Delhi Law Minister Kapil Mishra) को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के राऊज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से दिए गए जांच के आदेश को निरस्त कर दिया है। स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने यह आदेश दिया।

कोर्ट ने 25 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान इस मामले के मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायतकर्ता मोहम्मद इलियास (Mohammad Ilyas) की ओर से वकील महमूद प्राचा ने दलीलें रखी थीं। उन्होंने कहा था कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच करने का आदेश कानून-सम्मत था। इसके पहले सेशंस कोर्ट ने 9 अप्रैल को मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट के याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया था। सेशंस कोर्ट में कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस ने याचिका दायर की थी।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिल्ली दंगों में शामिल होने के मामले में कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया था। एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया (Additional Chief Judicial Magistrate Vaibhav Chaurasia) ने ये आदेश दिया था। इसके पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी कपिल मिश्रा के मामले में लापरवाही बरतने पर ज्योति नगर थाने के एसएचओ पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा था कि कपिल मिश्रा के खिलाफ संज्ञेय आरोप हैं और इसकी जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया था। इसके पहले कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) ने कहा था कि या तो जांच अधिकारी ने कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई जांच नहीं की या उसने कपिल मिश्रा के खिलाफ आरोपों को छिपाने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि आरोपी कपिल मिश्रा सार्वजनिक व्यक्ति है और उसके बारे में ज्यादा जांच की जरुरत है। क्योंकि ऐसे लोग जनता के मत को सीधे-सीधे प्रभावित करते हैं। सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति को संविधान के दायरे में रहने की उम्मीद की जाती है।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि जिस तरह के बयान दिए गए हैं वे सांप्रदायिक सद्भाव पर बुरी तरह असर डालते हैं। ऐसे बयान अलोकतांत्रिक होने के साथ साथ देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर हमला है। ऐसे बयान संविधान के मूल चरित्र का खुला उल्लंघन है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए सांप्रदायिक और धार्मिक सद्भाव से जुड़ा हुआ है। ये देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है। आरोपी को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का लाभ उठाने का हक है वैसे ही उस पर सांप्रदायिक सद्भाव को संरक्षित रखने की भी जिम्मेदारी है।

उल्लेखनीय है कि कपिल मिश्रा उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं। राऊज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत मोहम्मद इलियास (Rouse Avenue Court by Mohammad Ilyas) ने दायर की थी।

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