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New Delhi : देश के स्कूली बच्चों को श्रम के भंवरजाल से बचाने की अंतरराष्ट्रीय पहल

एजुकेशन इंटरनेशनल और भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ साझा कार्यक्रम लागू करेंगे
नई दिल्ली: (New Delhi)
देश के स्कूली बच्चों को श्रम के भंवरजाल से बाहर निकालने का संकल्प भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ (नई दिल्ली और एजुकेशन इंटरनेशनल (बेल्जियम) ने लिया है। इस अंतरराष्ट्रीय पहल पर शुक्रवार को यहां न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित होटल सूर्या में दुनिया भर के शिक्षाविदों ने चर्चा की। इस दो दिवसीय सम्मलेन के पहले दिन भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामपाल सिंह और उपाध्यक्ष सुशील पाण्डेय, नीदरलैंड की राजनयिक पॉलिना क्रोमिक एवं एजुकेशन इंटरनेशनल की अध्यक्ष मिसेज सुजन हॉपगूड ने स्वैच्छिक संगठनों और प्रतिनिधियों को मसौदे की जानकारी दी।

प्रमुख वक्ताओं ने दोनों संगठनों ने संयुक्त अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर चुनौतियों का सामना करने पर विस्तृत चर्चा की। मिसेज सुजन हॉपगूड ने कहा, दुनिया में भारत ऐसा देश है जहां सबसे अधिक बाल श्रमिक हैं। इनमें स्कूल गोइंग स्टूडेंट्स की संख्या में इजाफा चिंताजनक है। इसे समाप्त करना महत्वपूर्ण चुनौती है। शिक्षक संगठनों और सरकार के प्रयासों के बावजूद ऐसी स्थिति गंभीर इशारा कर रही है।

उन्होंने कहा, गरीबी केवल एक परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक प्रणाली के परिणाम हैं जहां आर्थिक लाभ को मानव कल्याण की बजाए प्राथमिकता दी जाती है। यह स्थिति असमानता, भेदभाव, अलगाव, औपनिवेशिकता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी, अनौपचारिकता का प्रचलन और गरीब के लिए उचित रोजगार के लिए सीमित पहुंच की वजह से बनती है।

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामपाल सिंह ने कहा कि बाल श्रम गंभीर मुद्दा है। यह बचपन का अधिकार छीन लेता है। पढ़ने वाले बच्चों को अमानवीय स्थिति में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस (12 जून ) के आलोक में यह महत्वपूर्ण अवसर है कि हम सभी बाल श्रम उन्मूलन का संकल्प लें।

संघ के उपाध्यक्ष सुशील पाण्डेय ने कहा इस समस्या के खात्मे के लिए हम सबको संगठित और नियोजित समाधान ढूंढने होंगे। उन्होंने कहा, हालांकि 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित हो चुका है। इसमें मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। पाण्डेय ने इस बात पर हैरानी जताई कि इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भगीरथ प्रयास नहीं हो रहे। उन्होंने कहा एजूकेशन इंटरनेशनल से दुनिया के लगभग सभी देशों के शिक्षक संगठन संबद्ध हैं। संगठन का मकसद मानवीय अधिकार के रूप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।

स्वैच्छिक संगठन अरावली के कार्यक्रम निदेशक वरुण शर्मा ने सम्मेलन में चर्चा के प्रमुख बिंदु ‘वर्क: नो चाइल्ड बिजनेस एलायंस’ के उद्देश्य को साफ किया। उन्होंने कहा यह कार्यक्रम सभी बच्चों को 5 से 14 वर्ष की आयु तक स्कूल में लाने का लक्ष्य और व्यापार जीविका में बेहतर मानदंड बनाने का प्रयास करता है। यह कार्यक्रम उद्योग समूहों, व्यापार संघों आदि के समन्वय से संचालित हो रहा है।

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