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New Delhi : लगातार दूसरे दिन ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड, 90 के स्तर लुढ़की भारतीय मुद्रा

नई दिल्ली : (New Delhi) भारतीय मुद्रा रुपये की कीमत में गिरावट (Indian rupee continues its decline) लगातार जारी है। आज लगातार दूसरे दिन रुपये ने डॉलर की तुलना में ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड बनाया। मुद्रा बाजार के इतिहास में पहली बार भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई। हालांकि बाद में डॉलर की डिमांड में कुछ कमी आने के कारण रुपये की स्थिति में मामूली सुधार हुआ, जिससे भारतीय मुद्रा 42 पैसे की कमजोरी के साथ ऑल टाइम लो क्लोजिंग का नया रिकॉर्ड बनाते हुए 89.95 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई। इसके पहले पिछले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय मुद्रा 89.53 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई थी।

रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ ही की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (interbank foreign exchange market) में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 17 पैसे की कमजोरी के साथ 89.70 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। आज का कारोबार शुरू होने के बाद डॉलर की डिमांड बढ़ने के कारण लगभग पूरे दिन रुपये पर दबाव बना रहा। इसी दबाव के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 90 रुपये के अभी तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि बाद में आयातकों की ओर से डॉलर की मांग कम होने पर रुपया निचले स्तर से 5 पैसे की सुधार के साथ 89.95 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।

मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ज्यादातर दूसरी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन किया। आज के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 22.84 पैसे की कमजोरी के साथ 118.74 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया आज 29.98 पैसे की गिरावट के साथ 104.35 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ।

मुद्रा बाजार में रुपये की लगातार जारी कमजोरी के संबंध में टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज (Tarkeshwar Nath Vaishnav, CEO of TNV Financial Services) के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि भारत के बढ़ते व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) से चालू वित्त वर्ष में करंट अकाउंट डेफिसिट के और बढ़ने की उम्मीद है। एचएसबीसी ने भी भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट पिछले साल के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर इस वित्त वर्ष में जीडीपी का 1.4 प्रतिशत हो जाने का अनुमान जाहिर किया है।

तारकेश्वर नाथ का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बनाया है। भारत की अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी होने से भी रुपये पर निगेटिव असर पड़ रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल का इंपोर्ट बढ़ने और एक्सपोर्ट के मोर्चे पर आई कमजोरी करेंट अकाउंट डेफिसिट में उछाल आया है। इसकी वजह से डॉलर-रुपये ट्रेड के अहम टेक्निकल स्तर ब्रेक हुए हैं। एक अहम बात जीडीपी विकास दर की भी है। पिछली तिमाही में विकास दर में आई तेजी के बाद ब्याज दर घटने की गुंजाइश भी कम हुई है। इसका भी रुपये की मजबूती पर निगेटिव असर पड़ रहा है।

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