नई दिल्ली : भारत और हांगकांग सीमा शुल्क ने द्विपक्षीय सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान के आधार पर हांगकांग स्थित निर्यातकों और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में मौजूद भारतीय आयातकों से जुड़े व्यापार-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग (टीबीएमएल) के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया कि भारत और हांगकांग सीमा शुल्क ने भारतीय आयातकों से जुड़े व्यापार-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग (टीबीएमएल) के एक बड़े मामले का खुलासा किया गया है। इस कार्रवाई के दौरान 4 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। यह कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सरगनाओं को बेनकाब करने के लिए दोनों प्रशासन ने संबंधित कानूनों के तहत की गई है, जो उनके जांच और प्रवर्तन कार्रवाइयों को दर्शाती है।
मंत्रालय के मुताबिक यह कार्रवाई भारतीय सीमा शुल्क और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा हाल ही में संपन्न प्रवर्तन मामलों में सहयोग के वैश्विक सम्मेलन (जीसीसीईएम) के ठीक बाद सामने आई है। डीआरआई की जांच से पता चला कि सस्ते सिंथेटिक हीरों को प्राकृतिक हीरे बताया जा रहा था और 100 गुना से अधिक मूल्य लगाया जा रहा था।
खास बात यह है कि जहां आयात के अधिकांश घोषित बढ़े हुए मूल्य को बैंकिंग चैनलों के माध्यम से देश से बाहर भेजा गया था, वहीं निर्यात के लिए प्राप्त प्रेषण केवल 0.2 फीसदी के मामूली स्तर पर देखा गया था। इससे यह पता चलता है कि यह व्यापार काले धन को सफेद करने के लिए किया गया है। जांच में मिले साक्ष्य यह भी संकेत देते हैं कि इस व्यापार-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग का मास्टरमाइंड हांगकांग में मौजूद है। जांच के बाद सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 104 के प्रावधानों के तहत भारत में 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
पिछले हफ्ते, हांगकांग सीमा शुल्क ने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पता लगाने के लिए एक प्रवर्तन अभियान चलाया गया, जिसमें हीरे के व्यापार के जरिए लगभग 65 मिलियन डॉलर काले धन को सफेद किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान, हांगकांग सीमा शुल्क ने हांगकांग के कई क्षेत्रों में आठ परिसरों पर छापा मारा, जिसमें चार आवासीय परिसर और चार वाणिज्यिक इकाइयां शामिल थीं।
सीमा शुल्क विभाग ने मामले से जुड़े होने के संदेह में चार लोगों को गिरफ्तार किया है और उनकी कुल एक मिलियन डॉलर की संपत्ति जब्त करने की पहले ही व्यवस्था कर ली है। यह कार्रवाई पहले भारत में भारतीय सीमा शुल्क द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाई के आधार पर शुरू की गई थी।


