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New Delhi : साइबर ठगों पर आई4सी का डिजिटल प्रहार

New Delhi: I4C launches digital attack on cyber fraudsters

1855 दिन में 24.65 लाख शिकायतें दर्ज
ठगों के हाथ में जाने से बचाए ‘8690’ करोड़ रुपये
नई दिल्ली : (New Delhi)
डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठगों (cyber fraudsters) के खिलाफ देश की सुरक्षा दीवार और भी मजबूत हो गई है। ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) के अंतर्गत शुरू की गई रिपोर्टिंग प्रणाली ने पिछले 5 वर्षों में ठगों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए ₹8,690 करोड़ से अधिक की राशि बचाने में सफलता हासिल की है।

वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए I4C की शुरुआत
बता दें कि वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में I4C शुरु किया गया था। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ चालू किया गया है। I4C में एक अत्याधुनिक साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र (Cyber ​​Fraud Prevention Centre) (CFMC) स्थापित किया गया है, जहां प्रमुख बैंकों, वित्तीय मध्यस्थों, भुगतान एग्रीगेटरों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, आईटी मध्यस्थों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि साइबर अपराध से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई और निर्बाध सहयोग के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

12.94 लाख सिम कार्ड और 3.03 लाख मोबाइल डिवाइस ब्लॉक
ठगों के बुनियादी ढांचे को तोड़ने के लिए सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक 12.94 लाख सिम कार्ड और 3.03 लाख मोबाइल डिवाइस ब्लॉक कर दिए हैं। ‘संचार साथी’ और ‘NCRP’ के बीच सीधा तकनीकी जुड़ाव किया गया है, जिससे संदिग्ध नंबरों की जानकारी मिलते ही टेलीकॉम कंपनियां उन पर तुरंत कार्रवाई करती हैं।

‘संदिग्ध रजिस्टर’ और करोड़ों का सुरक्षा कवच
10 सितंबर 2024 को एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘संदिग्ध रजिस्टर’ शुरू किया गया। इसमें 23.05 लाख संदिग्धों का डेटा और 27.37 लाख ‘म्यूल अकाउंट्स’ (accounts opened in the name of others) की जानकारी दर्ज है। इसके जरिए अब तक ₹9,518 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन को बैंकों ने सफलतापूर्वक अस्वीकार कर दिया है।

जामताड़ा से मेवात तक: हॉटस्पॉट पर नकेल
साइबर अपराध के गढ़ माने जाने वाले इलाकों (such as Jamtara, Mewat, Ahmedabad) के लिए सात संयुक्त साइबर समन्वय दल गठित किए गए हैं। साथ ही, ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल की मदद से अपराधी और उनके मोबाइल टावर की लोकेशन को डिजिटल नक्शे पर देखा जाता है। इसी तकनीक की वजह से 21,857 से अधिक शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस और जजों की ‘डिजिटल पाठशाला’
अपराधियों से दो कदम आगे रहने के लिए पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को ‘CyTrain’ पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक लगभग 1.5 लाख अधिकारी इस पर रजिस्टर हो चुके हैं। दिल्ली और असम में अत्याधुनिक डिजिटल जांच सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जो पुलिस को मोबाइल और कंप्यूटर से सबूत जुटाने में मदद करते हैं।

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