नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (The Delhi High Court) ने भारतीय मूल की ब्रिटिश उपन्यासकार एवं कवि निताशा कौल की भारत में प्रवेश करने की अनुमति पर रोक लगाने और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) के दर्जे (Overseas Citizen of India (OCI) status) को निरस्त करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। जस्टिस सचिन दत्ता (Justice Sachin Datta) की पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2026 को होगी।
निताशा कौल 24 फरवरी 2024 को बेंगलुरु एयरपोर्ट (Bengaluru airport on February 24, 2024) पहुंची थीं जहां से उन्हें रोक कर वापस भेज दिया गया। ब्रिटेन वापस भेजने के पहले निताशा कौल को 24 घंटे की हिरासत में भी रखा गया था। निताशा कर्नाटक सरकार के आमंत्रण (invitation of the Karnataka government) पर कांस्टीट्यूशन एंड नेशनल यूनिटी नामक विषय पर बोलने के लिए बेंगलुरु पहुंची थीं। उनके पास ब्रिटेन का वैध पासपोर्ट भी था। मई 2025 में केंद्र ने निताशा कौल का ओसीआई दर्ज खत्म कर दिया था। निरस्त करने के आदेश में निताशा कौल पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। आदेश में कहा गया था कि निताशा के लेख और भाषण भारत की संप्रभुता को चोट पहुंचाते हैं।
निताशा कौल यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रोफेसर हैं। कश्मीरी पंडित निताशा कौल ने इकोनोमिक्स की अपनी पढ़ाई दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से की है। उन्होंने इकोनोमिक्स और फिलॉसफी में ब्रिटेन से पीएचडी की है। निताशा ने कश्मीर, राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व पर लेख लिखे हैं। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद निताशा कौल ने विदेश मामलों की अमेरिकी संसदीय कमेटी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए थे। इस कमेटी ने कश्मीर में मानवाधिकार के मामले पर निताशा के बयान दर्ज किए थे।


