नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार (central government) ने कोयला एवं लिग्नाइट ब्लॉक से संबंधित अन्वेषण कार्यक्रमों एवं भूवैज्ञानिक रिपोर्ट के लिए अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। नई प्रक्रिया के तहत अब 2022 में इस उद्देश्य के लिए गठित सरकारी समिति से मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) ने सोमवार को जारी एक बयान में बताया कि कोयला एवं लिग्नाइट ब्लॉक से संबंधित अन्वेषण कार्यक्रमों व भूवैज्ञानिक रिपोर्ट के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इस कदम का मकसद कारोबार सुगमता को बढ़ाना और कुशल एवं टिकाऊ अन्वेषण को बढ़ावा देना है। कोयला मंत्रालय के द्वारा प्रकाशित नई कार्यप्रणाली इसकी वेबसाइट https://www.coal.nic.in/sites/default/files/2025-12/01-12-2025a-wn.pdf पर उपलब्ध है।
मंत्रालय के मुताबिक कोयला मंत्रालय ने पहले की कार्यप्रणाली की समीक्षा की है। क्यूसीआई-एनएबीईटी के द्वारा मान्यता प्राप्त एवं अन्य एपीए द्वारा समकक्ष समीक्षा प्राप्त अधिसूचित मान्यता प्राप्त अन्वेषण एजेंसियों (Accredited Exploration Agencies) (APAs) द्वारा तैयार कोयला एवं लिग्नाइट ब्लॉक के लिए अन्वेषण कार्यक्रमों व भूवैज्ञानिक रिपोर्ट (geological reports) (GRs) के अनुमोदन के लिए तंत्र को सरल बनाया गया है। कोयला मंत्रालय ने बताया कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयला एवं लिग्नाइट संसाधनों का तेज, अधिक कुशल और प्रौद्योगिकी रूप से मजबूत अन्वेषण जरूरी है। इसके अनुरूप, कोयला मंत्रालय प्रगतिशील सुधारों को लागू करना जारी रखे हुए है जो पारदर्शिता को बढ़ाते हैं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करते हैं और देश की ऊर्जा तैयारियों को सुदृढ़ करते हैं।
भूवैज्ञानिक रिपोर्ट की अनुमोदन प्रक्रिया में कम से कम 3 महीने की बचत होगी, जिसके परिणामस्वरूप कोयला ब्लॉक का शीघ्र चालू हो सकेगा और कोयला ब्लॉक आवंटियों को समय पर लक्ष्य पूरे करने में सुविधा मिलेगी। इस सुधार से अन्वेषण में तेजी आने, अनुमोदन की समय-सीमा कम होने और देश के कोयला संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा और सतत उपयोग में योगदान मिलने की उम्मीद है।


