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New Delhi : सरकार ने निर्यातकों को दायित्व पूरा करने के लिए दी राहत

New Delhi: Government provides relief to exporters to meet their obligations

निर्यात दायित्व की अवधि 31 अगस्त तक बढ़ाया
नई दिल्ली : (New Delhi)
पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) के बीच केंद्र सरकार ने निर्यातकों को उनके निर्यात दायित्वों को पूरा करने के लिए कुछ विशेष रियायतें दी हैं। सरकार ने उन्नत प्राधिकरण और ईपीसीजी प्राधिकरण के लिए निर्यात दायित्व अवधि 31 अगस्त 2026 तक बढ़ा दिया है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) (DGFT) ने शनिवार को एक अधिसूचना में बताया कि जिन निर्यातकों के निर्यात दायित्व की अवधि एक मार्च से 31 मई 2026 के बीच समाप्त हो रही है, उन्हें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या जुर्माने के स्वतः ही 31 अगस्त 2026 तक का विस्तार दे दिया गया है।

अधिसूचना के मुताबिक यह कदम पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण माल की आवाजाही में आ रही दिक्कतों को देखते हुए उठाया गया है। डीजीएफटी ने जारी सार्वजनिक सूचना में कहा, “अंतरराष्ट्रीय पोत परिवहन मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने वाले मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए और निर्यातकों की सुविधा के लिए कुछ विशिष्ट ‘अग्रिम अधिकार पत्रों’ और ईपीसीजी अधिकार पत्रों की निर्यात दायित्व अवधि को बढ़ा दिया गया है।”

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) ने कहा कि डीजीएफटी ने अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह राहत विदेश व्यापार नीति के तहत शुल्क भुगतान के साथ उपलब्ध मौजूदा सुविधाओं के अतिरिक्त है। निर्यातक लंबे समय से इन दायित्वों को पूरा करने के लिए समय-सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।

मंत्रालय ने कहा कि निर्यात समुदाय पहले से ही अमेरिका के उच्च शुल्कों का सामना कर रहा था। पिछले महीने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने उनकी चुनौतियां और बढ़ा दी हैं। इस संघर्ष की वजह से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। मौजूदा तनाव ने समुद्री और हवाई माल ढुलाई दरों को भी बढ़ा दिया है, जबकि बीमा प्रीमियम में भी उछाल आया है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो वैश्विक बाजारों में भारतीय वस्तुओं की कीमत प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (Export Promotion Capital Goods) (EPCG) योजना के तहत घरेलू कंपनियों को शुल्क मुक्त मशीनों के आयात की अनुमति दी जाती है, लेकिन इसके बदले उन्हें एक निश्चित समय सीमा में निर्यात का लक्ष्य पूरा करना होता है। देश का निर्यात जनवरी में 0.61 फीसदी बढ़कर 36.56 अरब डॉलर रहा, जबकि व्यापार घाटा तीन महीने के उच्चतम स्तर 34.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

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