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New Delhi : विदेशी निवेशकों ने 2025 में घरेलू शेयर बाजार से 1.66 लाख करोड़ निकाले, आईटी सेक्टर में की सबसे ज्यादा बिकवाली

New Delhi: Foreign Investors Withdrew ₹1.66 Lakh Crore from the Domestic Stock Market in 2025, with the Highest Selling in the IT Sector

नई दिल्ली : (New Delhi) वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy) के मोर्चे पर लगातार जारी उतार-चढ़ाव के कारण साल 2025 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) में शेयरों की बिक्री करके 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर ली। इस साल विदेशी निवेशकों ने आईटी, एफएमसीजी, पावर, हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्युरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन एंड कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स, कैपिटल गुड्स, डायवर्सिफाइड इक्विटीज और टेक्सटाइल सेक्टर के शेयरों में जम कर बिकवाली की। हालांकि, इस साल विदेशी निवेशक टेलीकम्युनिकेशन, ऑयल एंड गैस, सर्विसेज, केमिकल तथा मेटल एंड माइनिंग सेक्टर में खरीदार भी बने रहे।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) (National Securities Depository Limited) ने आंकड़े के जरिये बताया कि साल 2025 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा बिकवाली आईटी सेक्टर में की। इसी तरह फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) (Fast Moving Consumer Goods) और पावर सेक्टर में भी विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते रहे। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों ने आईटी सेक्टर में 74,698 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इसी तरह एफएमसीजी सेक्टर में 36,786 करोड़ रुपये के शेयर विदेशी निवेशकों ने बेच दिए। वहीं पावर सेक्टर में विदेशी निवेशकों ने साल 2025 का दौरान 26,522 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की।

घरेलू शेयर बाजार (domestic stock market) में 2025 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई जोरदार बिकवाली की बड़ी वजह वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल, जियो पॉलिटिकल टेंशन और अर्निंग में आई गिरावट रहीं। इसके अलावा इंडियन इक्विटीज का हाई वैल्यूएशन, भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ की बाधा और विकसित देशों के बाजार में आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना की वजह से भी विदेशी निवेशकों ने साल 2025 के दौरान घरेलू शेयर बाजार से जम कर निकासी की।

कैलेंडर ईयर 2025 के दौरान आईटी सेक्टर पर विदेशी निवेशकों ने लगातार दबाव बनाए रखा। बताया जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से आईटी सेक्टर पर सबसे अधिक प्रतिकूल असर पड़ा। लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के बीच इस बात को लेकर चिंता बनी रही कि एआई की लोकप्रियता बढ़ने से भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। निवेशकों के मन में ये चिंता इसलिए भी बनी, क्योंकि पश्चिमी देशों में एआई के प्रति बढ़ रहे रुझान की वजह से टेक्नोलॉजी सेक्टर के बजट में कमी आ गई है। इसीलिए इस बात की आशंका बन गई कि अगर भारत में एआई की लोकप्रियता बढ़ी, तो यहां भी आईटी सेक्टर के ग्रोथ पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर के शेयरों की जमकर बिकवाली की।

इसी तरह फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी)(Fast-Moving Consumer Goods) सेक्टर के शेयरों में भी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जम कर बिकवाली की। 2025 के दौरान महंगाई बढ़ने के कारण आम लोगों की क्रय शक्ति में कमी आने, ग्रामीण इलाकों में मांग कम होने और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तथा लोकल ब्रांड के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ जाने के कारण भी पिछले साल विदेशी निवेशकों की नजर में एफएमसीजी सेक्टर कम आकर्षक बना रहा। इसके अलावा पावर सेक्टर भी रेगुलेटरी रिस्क, हाई लेवल बॉरोइंग और जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण विदेशी निवेशकों के सेलिंग टारगेट में बना रहा।

आईटी, एफएमसीजी और पावर सेक्टर के अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों ने साल 2025 के दौरान हेल्थकेयर सेक्टर में 24,967 करोड़ रुपये, कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में 21,369 करोड़ रुपये, कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में 16,524 करोड़ रुपये, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में 14,903 करोड़ रुपये, रियल्टी सेक्टर में 12,635 करोड़ रुपये, ऑटोमोबाइल सेक्टर में 11,898 करोड़ रुपये तथा कंस्ट्रक्शन एंड कंस्ट्रक्शन मटेरियल सेक्टर में 15,791 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।

विदेशी निवेशक साल 2025 के दौरान मुख्य रूप से बिकवाल की भूमिका में बने रहे। विदेशी निवेशकों के लिए इस साल बिकवाली का ट्रेंड होने के बावजूद एफआईआई ने टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में जम कर खरीदारी की। बताया जा रहा है कि आकर्षक कैश फ्लो तथा लगातार बढ़ रही अर्निंग और प्रॉफिटेबिलिटी के कारण विदेशी निवेशकों ने टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में साल 2025 के दौरान 48,222 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसी तरह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ऑयल एंड गैस सेक्टर में 8,431 करोड़ रुपये, सर्विसेज सेक्टर में 7,071 करोड़ रुपये, केमिकल सेक्टर में 6,017 करोड़ रुपये तथा मेटल एंड माइनिंग सेक्टर में 4,661 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

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