
नयी दिल्ली : क्या आप घरेलू हिंसा का सामना कर रही हैं, या कार्यस्थल पर छेड़छाड या यौन शोषण के दौर से गुजर रही हैं, या ब्लैकमेल की जा रही हैं और नहीं जानती कि ऐसी स्थितियों से कैसे निपटा जाए?
ऐसी ही कश्मकश से बचाने के लिए दिल्ली पुलिस लड़कियों और महिलाओं से संपर्क कर रही है, खासतौर पर उनसे जो समाज के कमजोर वर्गों से आती हैं, ताकि उन्हें उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जा सके और बताया जा सके कि गुनाहगारों के खिलाफ क्या किया जाए।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को ‘‘अकेले नहीं हैं आप’’ अभियान शुरू किया ताकि महिलाओं के खिलाफ विभिन्न प्रकारों के अपराधों के प्रति जागरूकता पैदा की जा सके और बताया जा सके कि सुरक्षा दांव पर होने पर वे क्या कदम उठा सकती हैं।
दिल्ली पुलिस ने यह अभियान महिलाओं में कानूनी अधिकारों की जानकारी और जागरूकता का स्तर समझने के लिए शिक्षिकाओं और प्रोफेसर सहित कई महिलाओं से मुलाकात के बाद शुरू किया है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘जब हमने सर्वेक्षण किया तो पाया कि कई महिलाओें और लड़कियों को , खासतौर पर कमजोर वर्ग से आने वाली महिलाओं को नहीं पता कि शिकायत कैसे की जाए। वे मानकर चलती हैं कि लड़ाई या शारीरिक हमला होने पर ही पुलिस से संपर्क किया जा सकता है।’’
उन्होंने बताया, ‘‘कई महिलाओं को पीछा करने, तस्वीरों से छेड़छाड़ करने और ब्लैकमेल करने जैसे अपराधों की जानकारी नहीं है। उन्हें यह भी पता नहीं है कि लिव इन रिलेशन में रहने के दौरान भी किसी तरह की हिंसा होने पर पुलिस से संपर्क किया जा सकता है। उन्हें यह नहीं पता कि क्या कदम उठाने चाहिए क्योंकि इनमें से अधिकतर महिलाएं घरों की चारदीवारी तक सीमित हैं।’’
उन्होंने बताया कि 15 दिन के अभियान के दौरान दिल्ली पुलिस महिलाओं और लड़कियों को घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, ऑनलाइन धोखाधड़ी और उत्पीड़न सहित विभिन्न प्रकारों के अपराधों के बारे में शिक्षित करेगी।’’
अधिकारियों ने बताया कि पहली बार अभियान के लिए जारी विज्ञापन के साथ ‘‘क्यूआर कोड’’ दिया गया है जिसे स्कैन करने पर पाठक दिल्ली पुलिस के यूट्यूब चैनल पर पहुंचेगा, जहां महिलाओं के खिलाफ विभिन्न प्रकार के अपराधों और ऐसे मामलों को दर्ज कराने के तरीकों की जानकारी दी गई है।
दिल्ली पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी सुमन नलवा ने कहा, ‘‘प्रिंट, सोशल मीडिया और यहां तक एफएम रेडियो विज्ञापनों में हमारा मुख्य ध्येय महिलाओं और लड़कियों को बताना है कि वे हमसे संपर्क कर सकती हैं। अगर वे लैंगिक अपराध का दंश झेल रही हैं तो वे अकेले नहीं हैं।’’


