
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया संकट के चलते देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों और महंगाई में आई बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब देश को आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव की जरूरत है।
रमेश ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब मोदी सरकार के समर्थक भी सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त करने लगे हैं। महंगाई के अनुमान तेजी से बढ़ रहे हैं जबकि विकास दर के आकलन घट रहे हैं, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगातार घट रहा है और आपूर्ति शृंखलाओं का प्रबंधन इतना खराब हो गया है कि प्रधानमंत्री को उपभोक्ताओं से खपत कम करने की अपील करनी पड़ रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि निवेश का माहौल बेहद कमजोर है और निजी निवेश दर में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने इसके पीछे कई कारण गिनाए जिनमें वास्तविक मजदूरी का ठहराव, उपभोक्ता मांग की कमी, नीतिगत अस्थिरता और कर अधिकारियों की छापेमारी से पैदा हुआ भय, चीन से आयातित सस्ते माल की वजह से घरेलू उद्योग को नुकसान, सरकार समर्थित अधिग्रहणों से बढ़ती एकाधिकार प्रवृत्ति और कॉरपोरेट जगत को स्वतंत्र निवेश के बजाय राजनीतिक चंदे के जरिए लाभ कमाने की प्रवृत्ति शामिल है।
रमेश ने कहा कि कॉरपोरेट भारत की कर दरें रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर हैं और उनकी आय रिकॉर्ड ऊंचाई पर है, शेयर बाजार भी मजबूत दिख रहा है, लेकिन निवेश की गति गायब है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो कंपनियां निवेश करने की स्थिति में हैं वे देश से बाहर निवेश कर रही हैं। प्रधानमंत्री जनता को आश्वासन और उपदेश देने में व्यस्त हैं जबकि देश की आर्थिक नींव (country’s economic foundations) कमजोर हो रही है।


