
नई दिल्ली : (New Delhi) सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2019 से पहले हुए भूमि अधिग्रहण मामलों में सोलाटियम और ब्याज देने से जुड़े अपने फैसले पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) (National Highway Authority of India) की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इससे किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिली है। चीफ जस्टिश सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां (Chief Justice Surya Kant and Justice Ujjal Bhuyan) की बेंच ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में सही मुआवजा मिलना संवैधानिक अधिकार है। इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। इसे सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से नहीं जोड़ा जा सकता। पूरा मामला उन भूमि अधिग्रहण मामलों से जुड़ा है जो 2019 से पहले हुए थे, जिसमें प्रभावित लोगों को सोलाटियम और ब्याज देने का सवाल था। NHAI ने पहले के फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए अपने पुराने फैसले को बरकरार रखा।
‘₹29 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा’
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन मालिकों को मिलने वाला ब्याज भूमि अधिग्रहण कानून (Land Acquisition Act) के अनुसार 9% होगा, न कि NHAI एक्ट के 5% की सीमा के अनुसार। NHAI ने तर्क दिया था कि इससे उस पर करीब ₹29,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने इसे समीक्षा का आधार मानने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मामलों को दोबारा नहीं खोला जा सकता। यानी 2018 से पहले के बंद मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, लेकिन जो दावे पहले से लंबित हैं, उन पर कानून के अनुसार फैसला होगा। कोर्ट ने कहा कि जमीन मालिकों के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिरता- दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।


