
नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार (Central Government) ने कहा है कि उच्च न्यायालय एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाने का आदेश नहीं दे सकता है, क्योंकि ऐसा करना असंवैधानिक और शक्ति विभाजन के सिद्धांत के खिलाफ होगा। उच्च न्यायालय दिल्ली में एयर प्यूरीफायर (air purifiers in Delhi) पर जीएसटी घटाने की मांग करने वाली याचिका पर 9 जनवरी को सुनवाई करने वाला है।
केंद्र सरकार (Central Government) ने उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 279ए के तहत जीएसटी का कोई भी फैसला जीएसटी काउंसिल ही कर सकती है। टैक्स की दरों पर फैसला करने की एक जटिल संघीय प्रक्रिया होती है। इस मसले पर केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बनी होती है, ताकि सबके आर्थिक हितों की सुरक्षा की जा सके। ऐसे में इस मामले पर न्यायिक हस्तक्षेप संविधान के दायरे के बाहर होगा।
इससे पहले 26 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने एयर प्यूरीफायर पर दिल्ली में 18 फीसदी जीएसटी घटाने की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि जीएसटी काउंसिल की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नहीं हो सकती। केंद्र सरकार ने कहा था कि इस याचिका से भानुमति का पिटारा खुल जाएगा और कई दूसरे मामलों के लिए लोग कोर्ट आना शुरू कर देंगे। केंद्र सरकार ने कहा था कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित करने का फैसला स्वास्थ्य मंत्रालय ले सकता है लेकिन याचिका में स्वास्थ्य मंत्रालय को पक्षकार बनाया ही नहीं गया है। कोर्ट ने कहा था कि जब तक केंद्र सरकार का इस पर जवाब नहीं आ जाता तब तक कोई फैसला नहीं किया जा सकता है।
इसके पहले 24 दिसंबर, 2025 को उच्च न्यायालय ने जीएसटी काउंसिल को आदेश दिया था कि वो एयर प्यूरीफायर पर से दिल्ली में 18 फीसदी जीएसटी घटाने की मांग पर तुरंत विचार करें। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय (Chief Justice D.K. Upadhyay) की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि अगर जीएसटी काउंसिल की बैठक फिजिकल संभव नहीं हो तो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक कर इस पर फैसला करें। उच्च न्यायालय ने इस बात को नोट किया था कि संसदीय कमेटी ने दिसंबर में इस बात की सिफारिश की थी कि एयर प्यूरीफायर पर से जीएसटी दरें घटाने पर सहानूभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। याचिका वकील कपिल मदान (advocate Kapil Madan) ने दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण की खराब स्थिति को देखते हुए एयर प्यूरीफायर को सुविधा की वस्तु नहीं मानी जा सकती है। एयर प्यूरीफायर लोगों को स्वच्छ हवा देने में सहायक होता है इसलिए इसे चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में माना जाना चाहिए। ऐसे में एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी की दरें घटाई जानी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार के 2020 के नोटिफिकेशन के मुताबिक एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ये जानते हुए भी कि एयर प्यूरीफायर की भूमिका जान बचाने में कितनी जरूरी है, इस पर लगातार 18 फीसदी जीएसटी का अधिभार लगाना मनमाना और अन्यायपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत है।
याचिका में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से नेशनल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ (National Programme on Climate Change and Human Health) को लेकर जारी एडवाइजरी में एयर प्यूरीफायर को खराब और गंभीर श्रेणी के वायु गुणवत्ता की स्थिति में एक सुरक्षात्मक उपकरण बताया गया है। ऐसे में काफी खराब गुणवत्ता वाले हवा के लिए एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण मानते हुए इस पर जीएसटी घटाने की जरूरत है।


