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New Delhi : एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने की अपील का केंद्र ने किया विरोध

नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार (central government) ने एयर प्यूरीफायर पर दिल्ली में (air purifiers in Delhi) 18 फीसदी जीएसटी घटाने की मांग का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नहीं हो सकती। केंद्र सरकार ने इस मसले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की। मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार ने याचिका का जवाब देने के लिए समय देने की मांग की तो याचिकाकर्ता ने कहा कि लोग प्रदूषण से मर रहे हैं और आप जवाब देने के लिए समय की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि इस याचिका से भानुमति का पिटारा खुल जाएगा और कई दूसरे मामलों के लिए लोग कोर्ट आना शुरू कर देंगे। केंद्र सरकार ने कहा कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस (air purifiers as medical devices) घोषित करने का फैसला स्वास्थ्य मंत्रालय ले सकता है लेकिन याचिका में स्वास्थ्य मंत्रालय को पक्षकार बनाया ही नहीं गया है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार का इस पर जवाब नहीं आ जाता तब तक कोई फैसला नहीं किया जा सकता है। उसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर 9 जनवरी की सुनवाई नियत करते हुए कहा कि इसे संबंधित बेंच के पास 9 जनवरी को लिस्ट किया जाए।

इसके पहले 24 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने जीएसटी काउंसिल को आदेश दिया था कि वो एयर प्यूरीफायर पर से दिल्ली में 18 फीसदी जीएसटी घटाने की मांग पर तुरंत विचार करें। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि अगर जीएसटी काउंसिल की बैठक फिजिकल संभव नहीं हो तो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक कर इस पर फैसला करें।

उच्च न्यायालय ने इस बात को नोट किया था कि संसदीय कमेटी (parliamentary committee) ने दिसंबर में इस बात की सिफारिश की थी कि एयर प्यूरीफायर पर से जीएसटी दरें घटाने पर सहानूभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। याचिका वकील कपिल मदान ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण की खराब स्थिति को देखते हुए एयर प्यूरीफायर सुविधा वस्तु नहीं मानी जा सकती है। एयर प्यूरीफायर लोगों को स्वच्छ हवा देने में सहायक होता है इसलिए इसे चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में माना जाना चाहिए। ऐसे में एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी की दरें घटाई जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार के साल 2020 के नोटिफिकेशन के मुताबिक एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ये जानते हुए भी कि एयर प्यूरीफायर की भूमिका जान बचाने में कितनी जरूरी है, इस पर लगातार 18 फीसदी जीएसटी का अधिभार लगाना मनमाना और अन्यायपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

याचिका में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से नेशनल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ (National Programme on Climate Change and Human Health) को लेकर जारी एडवाइजरी में एयर प्यूरीफायर को खराब और गंभीर श्रेणी के वायु गुणवत्ता की स्थिति में एक सुरक्षात्मक उपकरण बताया गया है। ऐसे में काफी खराब गुणवत्ता वाले हवा के लिए एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण मानते हुए इस पर जीएसटी घटाने की जरूरत है।

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