
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण दुनिया के तमाम देशों की तरह ही भारत की अर्थव्यवस्था पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है। इस दबाव की वजह से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (manufacturing sector) के साथ ही सप्लाई और सर्विस सेक्टर पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ा है। संकट की स्थिति में केंद्र सरकार जल्दी ही बड़ा राहत पैकेज जारी करने का ऐलान कर सकती है।
स्पेशल क्रेडिट गारंटी स्कीम (Special Credit Guarantee Scheme) नाम के ढाई लाख करोड़ के इस राहत पैकेज का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि जल्दी ही इस ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है। इस राहत पैकेज को कोरोना संकट के दौरान साल 2020 में लाई गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) (ECGLS) के तर्ज पर तैयार किया गया है। हालांकि इस राहत पैकेज का दायरा और बजट ईसीजीएलएस की तुलना में काफी अधिक बड़ा होगा।
जानकारों के अनुसार इस क्रेडिट गारंटी स्कीम के जरिए केंद्र सरकार उन सभी सेक्टर्स को वित्तीय सहायता देगी, जो पश्चिम एशिया में जारी जंग की वजह से प्रभावित हुए हैं। खासकर, जिन सेक्टर्स को युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें इस राहत पैकेट के जरिए वित्तीय सहायता देकर लिक्विडिटी क्रंच से बचाने की कोशिश की जाएगी।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार राहत पैकेज के तहत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (National Credit Guarantee Trustee Company) (NCGTC) के जरिए कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज पर केंद्र सरकार 90 प्रतिशत की क्रेडिट गारंटी देगी। क्रेडिट गारंटी का मतलब है कि अगर कर्ज लेने वाली कोई कंपनी किस्तों का भुगतान करने में विफल रहती है, तो बैंक को होने वाले नुकसान के 90 प्रतिशत हिस्से की भरपाई केंद्र सरकार करेगी। सरकार की इस गारंटी के कारण बैंक बिना किसी डर के जरूरतमंद कंपनियों को कर्ज दे सकेंगे।
कोरोना काल में शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) की तरह ही इस राहत पैकेज में भी कर्ज लेने वाली कंपनियां को कोई अतिरिक्त सुरक्षा या अतिरिक्त गारंटी देने की जरूरत नहीं होगी। इस योजना के लिए चार साल की अवधि का प्रस्ताव किया गया है। इस प्रस्ताव के अनुसार कर्ज लेने वाली कंपनियों को मूलधन चुकाने के लिए अधिकतम एक साल की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है। हालांकि इस अवधि में कंपनियों को नियमित तौर पर ब्याज का भुगतान करना होगा।
2020 में शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) (ECGLS) के तहत छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉलर एंड मीडियम इंटरप्राइजेज) सेक्टर की कंपनियों को मदद दी गई थी, लेकिन सरकार का इरादा इस बार इस राहत पैकेज को सिर्फ एमएसएमई तक ही सीमित रखने का नहीं है। इस बार लघु उद्योगों के साथ ही पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित हर सेक्टर को राहत पहुंचाया जाएगा।
हालांकि इस योजना में राहत पैकेज का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई सेक्टर के लिए रिजर्व रहेगा, ताकि उन्हें लिक्विडिटी क्रंच (liquidity crunch) की स्थिति से बचाया जा सके। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण रॉ मटेरियल की कमी का सामना कर रही कंपनियां और अपने माल का आयात तथा निर्यात करने में परेशानियों का सामना करने वाली कंपनियों को भी इस राहत पैकेज के जरिये मदद पहुंचाई जाएगी।


