नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) (Central Bureau of Investigation) ने दो घोटालों से जुड़े मामले में आरोपित बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Bihar Chief Minister Rabri Devi) की अपने और अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ लंबित केस को दूसरे जज के पास ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर अपनी दलीलें पूरी कर ली है। राउज एवेन्यू कोर्ट के प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट (Rouse Avenue Court Principal and District Judge Dinesh Bhatt) ने राबड़ी देवी की ओर से जवाबी दलीलें सुनने के लिए कल यानि 16 दिसंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया।
सीबीआई ने राबड़ी देवी की याचिका का विरोध किया है। सीबीआई ने कहा है कि राबड़ी देवी जज को नीचा दिखाना करना चाहती हैं। सीबीआई की ओर से पेश वकील डीपी सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता ने संबंधित जज को नीचा दिखाने के लिए ये याचिका दायर की है। डीपी सिंह ने कहा कि राबड़ी देवी न्यायपालिका पर आरोप लगाती हैं जबकि संबंधित जज विशाल गोगने प्रक्रियाओं का पूरा पालन कर रहे हैं। डीपी सिंह ने कहा कि राबड़ी देवी अदालत को ध्वस्त करना चाहती हैं। वो ये तय नहीं कर सकतीं कि कौन सा जज केस सुने और कौन सा नहीं।
पहले की सुनवाई के दौरान राबड़ी देवी की ओर से पेश वकील ने कहा था कि सुनवाई कर रहे विशाल गोगने प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं। वे 2026 में किसी भी तरह फैसला सुनाना चाहते हैं। उन्होंने जज विशाल गोगने पर आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने आरोप तय करते समय याचिकाकर्ता को कोर्ट बुलाया था।
याचिका में राबड़ी देवी ने मामले की सुनवाई कर रहे जज विशाल गोगने (Judge Vishal Gogane) से दूसरे जज के पास स्थानांतरित करने के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जज विशाल गोगने उनके प्रति पक्षपाती हैं और पूर्व-नियोजित तरीके से मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। राबड़ी देवी ने जज विशाल गोगने के पास लंबित चार मामलों को दूसरे जज के पास ट्रांसफर करने की मांग की है। राबड़ी देवी के खिलाफ विशाल गोगने के पास रेलवे टेंडर घोटाला और लैंड फॉर जॉब घोटाला के केस हैं। 13 अक्टूबर को जज विशाल गोगने ने रेलवे टेंडर घोटाला मामले के आरोपितों लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया है।
राबड़ी देवी की याचिका में कहा गया है कि जज विशाल गोगने उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ एक तय मानसिकता के साथ सुनवाई कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि मामलों की सुनवाई के दौरान ऐसा लगता है कि जज विशाल गोगने अभियोजन पक्ष की मदद कर रहे हैं। वे निष्पक्ष जज की तरह व्यवहार नहीं करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज चार मामलों के स्वतंत्र ट्रायल के लिए दूसरे जज के पास ट्रांसफर किया जाए।
कोर्ट ने 13 अक्टूबर को रेलवे टेंडर घोटाला मामले की सीबीआई के जुड़े केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव (Lalu Yadav, Rabri Devi, and Tejashwi Yadav) के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूछे जाने पर तीनों ने कहा था कि वो निर्दोष हैं और ट्रायल का सामना करेंगे। उसके बाद कोर्ट ने तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया।
रेलवे टेंडर घोटाला मामले में 28 फरवरी को सीबीआई ने कहा था कि आरोपितों के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पुख्ता सबूत हैं। 28 जनवरी 2019 को कोर्ट ने ईडी की ओर से दर्ज केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नियमित जमानत दी थी। कोर्ट ने एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। 19 जनवरी 2019 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दर्ज केस में लालू यादव को नियमित जमानत दी थी।
कोर्ट ने 17 सितंबर 2018 को ईडी की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी समेत 16 लोगों को आरोपित बनाया गया है। ईडी ने जिन्हें आरोपित बनाया है उनमें लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।


