नई दिल्ली : भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डा. राजीव बहल ने बताया कि खानपान और जीवन शैली में बदलाव लाकर करीब 60 फीसदी मधुमेह के मरीज स्वस्थ हो सकते हैं।
शुक्रवार को उन्होंने बताया कि मधुमेह के मरीजों को लेकर देश में एक अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि डायबिटिक और प्री डायबिटिक के मामले भारत में बढ़े हैं। अध्ययन में इसके कारण को समझने, इसकी रोकथाम और समाज में जीवन शैली में आवश्यक बदलाव लाने पर ध्यान दिया गया है ताकि मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों का बोझ कम हो सकें। मधुमेह के कारण हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अन्य के उच्च जोखिम भी होते हैं। इसके लिए लोगों को एक ऐसी जीवन शैली अपनाने की जरुरत है, जिसमें स्वस्थ आहार और अधिक शारीरिक गतिविधियां शामिल हों।
आईसीएमआर द्वारा 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में किए गए राष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया कि देश में 10 करोड़ लोग मधुमेह से ग्रस्त हैं। इसके साथ 25 करोड़ से ज्यादा मोटापे का शिकार हैं। अध्ययन में पाया गया कि देश की 11.4 फीसदी आबादी मधुमेह से पीड़ित हैं और 15.3 फीसदी आबादी को भविष्य में मधुमेह होने की संभावना है।
लैंसेट में प्रकाशित आईसीएमआर के अध्ययन के मुताबिक डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज गोवा 26.4 प्रतिशत, पुदुचेरी 26.3 प्रतिशत और केरल 25.5 प्रतिशत में हैं जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार कम प्रसार वाले राज्य हैं। इस सर्वे में 1,13,043 लोगों को शामिल किया था, जिसमें 33,537 लोग शहर से थे और 79,506 लोग ग्रामीण क्षेत्र से थे।


