
नई दिल्ली : (New Delhi) अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव (international geopolitical tensions) के बावजूद घरेलू सर्राफा बाजार में बुधवार को कीमती धातुओं में नरमी का रुख देखने को मिला। आमतौर पर वैश्विक अस्थिरता के दौर में निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोना-चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे इनके दाम बढ़ते हैं। हालांकि इस बार मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड (US dollar and rising Treasury yields) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआती सत्र में सोने की कीमत में 2,305 रुपये से लेकर 2,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की सांकेतिक कमजोरी देखी गई। कीमतों में इस कमी के बाद देश के अधिकांश प्रमुख बाजारों में 24 कैरेट सोना 1,67,610 रुपये से 1,67,760 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करता नजर आया। 22 कैरेट सोने का भाव 1,53,640 रुपये से 1,53,790 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रहा। राष्ट्रीय राजधानी में चांदी का भाव 2,94,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।
राजधानी नई दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,67,760 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,53,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध रहा। आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,67,610 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,53,640 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिकता दिखा। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने का दाम 1,67,660 रुपये और 22 कैरेट का 1,53,690 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।
दक्षिण भारत में चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,67,610 रुपये और 22 कैरेट 1,53,640 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। कोलकाता में भी यही स्तर देखने को मिला। मध्य भारत के भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,67,660 रुपये और 22 कैरेट 1,53,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध रहा।
उत्तर भारत में लखनऊ और जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,67,760 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,53,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। पटना में 24 कैरेट सोने का भाव 1,67,660 रुपये और 22 कैरेट का 1,53,690 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
दक्षिण और पूर्वी राज्यों में भी यही प्रवृत्ति रही। बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,67,610 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,53,640 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिकता रहा।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी मुद्रा (US currency)में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि का सिलसिला जारी रहता है, तो निकट अवधि में कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता की स्थिति में निवेशकों की रणनीति तेजी से बदल सकती है, जिससे बाजार की दिशा भी प्रभावित होगी।


